Coal Shortage In India : देश के बिजली क्षेत्र से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के 45 बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंच गया है। इनमें 40 संयंत्र घरेलू कोयले से चलने वाले हैं। 25 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, इन संयंत्रों में या तो जरूरत के 25 फीसदी से भी कम कोयला बचा है या फिर तीन दिन से कम समय का ईंधन उपलब्ध है।
जुलाई के मुकाबले बढ़ी परेशानी
कोयले की कमी वाले बिजली संयंत्रों की संख्या जुलाई के अंत में 31 थी, जो अब बढ़कर 45 हो गई है। यानी कुछ ही हफ्तों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हुई है। बिजली संयंत्रों में कुल कोयला भंडार भी जुलाई के मुकाबले करीब 19 फीसदी घटा है। फिलहाल करीब 3.095 करोड़ टन कोयला उपलब्ध बताया गया है, जो लगभग 10 दिनों की जरूरत पूरी करने के बराबर है।
बारिश ने रोक दी कोयले की रफ्तार
कोयले की कमी के पीछे इस समय सबसे बड़ी वजह मानसून की बारिश बताई जा रही है। ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के कारण खदानों से कोयला निकालने और उसे बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने में परेशानी हुई है। इससे रेल के जरिए कोयला पहुंचाने की रफ्तार भी प्रभावित हुई है।
बिजली की मांग भी बनी बड़ी वजह
दूसरी तरफ बिजली की मांग पर भी दबाव बना हुआ है। मौसम में गर्मी के कारण कई इलाकों में एसी और कूलर का इस्तेमाल बढ़ा है। खासकर रात के समय बिजली की मांग ज्यादा रहने से कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसून में देश में सामान्य से करीब 12 फीसदी कम बारिश हुई है।
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क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कोयले की कमी से देशभर में बिजली कटौती होने लगेगी। हालांकि, अगर कोयले की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है और बिजली की मांग बढ़ती रहती है तो कुछ इलाकों में बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। स्थिति को संभालने के लिए बिजली मंत्रालय ने कुछ ताप बिजली संयंत्रों को अपनी तय रखरखाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है, ताकि उपलब्ध इकाइयों से ज्यादा बिजली बनाई जा सके। फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत कोयले की लगातार आपूर्ति बनाए रखने की है। अगर बारिश के कारण खनन और परिवहन में आई रुकावट जल्दी दूर होती है तो स्थिति संभल सकती है। लेकिन आने वाले दिनों में बिजली की मांग और कोयले की उपलब्धता पर नजर रखना जरूरी होगा।