Colombia Earthquake Wreaks Havoc: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार सुबह आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े इलाके में दहशत पैदा कर दी। भूकंप के बाद कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और कुछ जगहों पर भवनों के गिरने की खबर सामने आई। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।
सैन होसे डेल पालमार के पास था भूकंप का केंद्र
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण यानी USGS के अनुसार, भूकंप का केंद्र कोलंबिया के चोको क्षेत्र में सैन होसे डेल पालमार के पास था। भूकंप करीब 107 किलोमीटर की गहराई में आया। इसकी तीव्रता शुरुआती तौर पर 7.4 मापी गई। राजधानी बोगोटा से लगभग 400 किलोमीटर दूर आए इस भूकंप के झटके देश के कई हिस्सों में महसूस किए गए। पड़ोसी देशों के कुछ इलाकों में भी लोगों ने कंपन महसूस किया।
इमारतें खाली कराईं, कई जगह नुकसान
भूकंप के झटके महसूस होते ही कई शहरों में लोग अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। प्रभावित इलाकों में कुछ इमारतों के क्षतिग्रस्त होने और लोगों के मलबे में फंसने की खबरें सामने आई हैं। क्विब्दो, कैली, पेरेरा और मनीजालेस समेत कई क्षेत्रों में नुकसान की सूचना मिली है। बोगोटा में भी कई इमारतों को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया। स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का जायजा ले रही हैं।
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सुनामी की चेतावनी जारी नहीं
भूकंप के बाद सुनामी की आशंका को लेकर भी निगाहें बनी हुई थीं, लेकिन अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने कोलंबिया के लिए सुनामी चेतावनी जारी नहीं की। अलग-अलग एजेंसियों ने भूकंप की तीव्रता में मामूली अंतर दर्ज किया। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह दी गई है। राहत एजेंसियां संभावित आफ्टरशॉक्स और अतिरिक्त नुकसान को लेकर भी निगरानी कर रही हैं।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है कोलंबिया
कोलंबिया भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यहां समय-समय पर शक्तिशाली भूकंप आते रहे हैं। देश के कई हिस्से टेक्टोनिक प्लेटों और सक्रिय फॉल्ट सिस्टम के प्रभाव वाले क्षेत्रों में आते हैं। सोमवार के भूकंप के बाद भी प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और क्षतिग्रस्त इमारतों की स्थिति का आकलन करना है। जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।