ओलंपिक गेम्स का आयोजन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) कराती है। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स का संचालन कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (CGF) करता है। दोनों संस्थाओं के नियम और आयोजन की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
भाग लेने वाले देशों में बड़ा अंतर
ओलंपिक में दुनिया के 200 से ज्यादा मान्यता प्राप्त देश हिस्सा लेते हैं। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य देश और क्षेत्र शामिल होते हैं, जिनकी संख्या करीब 70 से 72 है। खास बात यह है कि इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड कॉमनवेल्थ में अलग-अलग टीमों से खेलते हैं, जबकि ओलंपिक में ग्रेट ब्रिटेन के नाम से एक साथ उतरते हैं।
समर और विंटर संस्करण
ओलंपिक के दो संस्करण होते हैं—समर ओलंपिक और विंटर ओलंपिक। दोनों अलग-अलग समय पर आयोजित किए जाते हैं। इसके विपरीत कॉमनवेल्थ गेम्स का केवल समर संस्करण आयोजित होता है और इसका कोई अलग विंटर संस्करण नहीं है।
प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धा
ओलंपिक को खेल जगत का सबसे प्रतिष्ठित आयोजन माना जाता है क्योंकि इसमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स भी बड़ा आयोजन है, लेकिन इसमें केवल सदस्य देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। इसलिए इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा ओलंपिक से अलग मानी जाती है।
खेलों की सूची भी अलग
दोनों आयोजनों में एथलेटिक्स, तैराकी, बॉक्सिंग और बैडमिंटन जैसे कई खेल समान हैं। लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन बॉल्स और नेटबॉल जैसे खेल भी शामिल होते हैं, जो ओलंपिक का हिस्सा नहीं हैं। वहीं ओलंपिक में स्केटबोर्डिंग और सर्फिंग जैसे आधुनिक खेल शामिल हैं, जो कॉमनवेल्थ गेम्स में नहीं खेले जाते।
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लोग क्यों हो जाते हैं कन्फ्यूज?
दोनों आयोजनों में उद्घाटन समारोह, मार्च पास्ट, पदक तालिका और चार-चार साल के अंतराल पर होने जैसी कई समानताएं हैं। यही वजह है कि कई लोग कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि इनके उद्देश्य, दायरे और संरचना में बड़ा अंतर है।