
High Court said: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत दर्ज रेप केस को खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है. आरोपी ने याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी, जिसमें उसने दावा किया था कि उसने पीड़िता से शादी कर ली है. लेकिन कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी और कहा कि POCSO एक्ट में समझौता मान्य नहीं है, चाहे पीड़िता और आरोपी बाद में विवाह कर लें. इस मामले में आरोपी ने 13 वर्षीय लड़की को बहला-फुसलाकर बिहार ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे. चार महीने बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और लड़की को बरामद किया.
नाबालिगों की सुरक्षा के लिए सख्त है कानून
हाईकोर्ट के जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नाबालिग और वयस्क के बीच स्वाभाविक रूप से शक्ति और सोच का अंतर होता है, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी कारण POCSO एक्ट बनाया गया है, जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा देता है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिग की उम्र के कारण उसकी सहमति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती, इसलिए इस तरह के मामलों में कोई समझौता या सहमति वैध नहीं मानी जाएगी.
रेप, अपहरण और पोक्सो के तहत केस जारी रहेगा
आरोपी के खिलाफ पुलिस ने अपहरण, बलात्कार और पोक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है. आरोपी का यह दावा कि वह अब पीड़िता का पति है, कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि शादी जैसे रिश्ते भी इस कानून के उल्लंघन को नहीं छिपा सकते. हाईकोर्ट का यह फैसला एक बार फिर साफ करता है कि नाबालिगों के साथ हुए अपराधों में कानून किसी भी प्रकार के समझौते या रिश्तों को राहत का आधार नहीं मानता.