Congress suffers major setback in Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव में भारी पराजय के बाद कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा घटना में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरवत जहां फातिमा ने पद से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा कि उनके 25 वर्ष के राजनीतिक जीवन में नैतिकता ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है। सरवत जहां ने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में महिलाओं को सिर्फ 8 फीसदी हिस्सा दिया गया, जिसका सीधा असर यह हुआ कि पार्टी के महिला नेतृत्व की उपस्थिति दोनों सदनों में शून्य हो गई। उन्होंने इसे कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण संबंधी मूल विचारों के विपरीत बताया और इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी माना।
महिला नेतृत्व की स्थिति पर जताई पीड़ा
सरवत जहां ने कहा कि पार्टी में महिला नेतृत्व की गिरती स्थिति उन्हें भीतर से आहत कर रही है। उन्होंने बताया कि हमेशा सोनिया गांधी को अपने नेतृत्व का आदर्श मानते हुए उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम किया, लेकिन इस बार हालात अलग थे। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी भले ही नारी न्याय और बराबरी की बात करते हों, लेकिन वास्तविकता इसके उलट दिखाई दी, जिससे उन्हें गहरी निराशा हुई। कांग्रेस का वह पारंपरिक नियम कि महिला कांग्रेस अध्यक्ष को विधानसभा टिकट दिया जाएगा—इस बार पूरी तरह तोड़ दिया गया, जिससे संगठन के भीतर सवाल खड़े हुए।
परंपरा टूटने से बढ़ा असंतोष
सरवत जहां ने साफ कहा कि महिला कांग्रेस अध्यक्ष को टिकट न देना न केवल परंपरा से हटकर फैसला था, बल्कि यह पार्टी की आंतरिक स्थिति को भी उजागर करता है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच गहरा असंतोष है। बिहार में महागठबंधन की हार के बाद से ही कांग्रेस में अंदरूनी तनाव बढ़ता जा रहा है, और अब सरवत जहां के इस्तीफे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतभेद खुले तौर पर सामने आने लगे हैं। उनका इस्तीफा संगठन के भीतर चल रही खींचतान और निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है