2025 में सोना और चांदी ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया, लेकिन अब बाजार में एक नई धातु की चर्चा तेज हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में तांबा सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। जहां सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, वहीं तांबा अब जरूरत की धातु बन चुका है। इलेक्ट्रिफिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन एनर्जी की रफ्तार ने तांबे को सीधे केंद्र में ला दिया है। यही कारण है कि जानकार इसे आने वाले वर्षों का “किंग मेटल” कह रहे हैं।
डिमांड बढ़ी, सप्लाई में भारी कमी
तांबे की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण सप्लाई और डिमांड का बिगड़ता संतुलन है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में तांबे की सप्लाई में करीब 1.24 लाख टन और 2026 में 1.5 लाख टन की कमी हो सकती है। दूसरी ओर बिजली, वायरिंग, ग्रिड और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग में तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट राकेश बंसल का कहना है कि यह कमी आने वाले कई वर्षों तक बनी रह सकती है, जिससे कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिलेगी।
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AI, EV और ग्रीन एनर्जी का असर
आज का दौर AI और इलेक्ट्रिक वाहनों का है और इन दोनों के लिए तांबा बेहद जरूरी है। डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक कारें, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट हर जगह तांबे की जरूरत है। भारत में भी तेजी से AI डेटा सेंटर्स बन रहे हैं, जहां भारी मात्रा में तांबे की खपत होती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना तांबे के यह तकनीकी बदलाव संभव ही नहीं है। यही वजह है कि तांबा अब सिर्फ औद्योगिक धातु नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक एसेट बनता जा रहा है।
निवेशकों के लिए अगला बड़ा मौका
सोना-चांदी ने 2025 में निवेशकों को मालामाल किया, लेकिन अब नजरें तांबे पर टिक गई हैं। राकेश बंसल का दावा है कि “अब तांबे की बारी है करोड़पति बनाने की।” उनका कहना है कि सीमित सप्लाई और वास्तविक जरूरत वाली डिमांड तांबे को मजबूत निवेश विकल्प बनाती है। ग्लोबल मार्केट में तांबे की कीमतें पहले ही 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं और 12,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के करीब पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 2025-26 में निवेश की कहानी सोना-चांदी से हटकर तांबे की ओर मुड़ सकती है।