Copper Prices Surge : दुनियाभर के कमोडिटी बाजार में इस समय तांबा सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोना और चांदी जहां पहले से निवेशकों की पसंद बने हुए हैं, वहीं अब तांबे की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाकर बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और इसे उद्योग जगत के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
वैश्विक बाजार में जोरदार उछाल
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। कीमतें 14,500 से 14,600 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पार निकल चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात बने रहे तो यह स्तर 15,000 डॉलर तक भी पहुंच सकता है। वैश्विक मांग और सीमित आपूर्ति इस तेजी की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।
क्यों बढ़ रही है मांग?
तांबा आधुनिक अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण धातुओं में शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, बिजली ग्रिड विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निवेश के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तांबे का उपयोग होता है, जिससे बाजार में इसकी खपत लगातार बढ़ती जा रही है।
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सप्लाई पर भी बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार कई देशों में खदानों से उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा है। दूसरी ओर अमेरिका में संभावित आयात शुल्क को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। इसी कारण व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में तांबे का भंडारण शुरू कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय गोदामों में उपलब्ध स्टॉक घटने लगा और कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिला।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर तांबा महंगा होने का असर घरेलू उद्योगों पर भी पड़ सकता है। बिजली, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि घरेलू बाजार में रुपये की मजबूती के कारण अभी कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी तेज बढ़ोतरी नहीं दिखी है।
आगे क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में तांबे का रुख मजबूत बना रह सकता है। मांग लगातार बढ़ रही है जबकि आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में भले ही थोड़ी स्थिरता या उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन लंबी अवधि में तांबे के लिए माहौल सकारात्मक माना जा रहा है। यही वजह है कि निवेशकों और उद्योग जगत दोनों की नजरें अब इस धातु पर टिकी हुई हैं।