आज के समय में कई लोग अपने पालतू जानवरों को सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानते हैं। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सामने आई यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यहां रहने वाले एक दंपत्ति ने अपने पालतू कुत्ते स्काई को बच्चे की तरह पाला है। जब उन्हें काम के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया जाना पड़ा, तो उन्होंने तय किया कि स्काई को अकेला नहीं छोड़ेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना क्यों न करना पड़े।
ऑस्ट्रेलिया ले जाना आसान नहीं
दंपत्ति को जब पता चला कि भारत से सीधे कुत्ते को ऑस्ट्रेलिया ले जाना मुमकिन नहीं है, तो वे परेशान हो गए। नियमों के मुताबिक स्काई को पहले किसी रेबीज मुक्त देश में छह महीने रहना जरूरी था। इस दौरान कई रिश्तेदारों और जानकारों ने उन्हें सलाह दी कि इतने खर्च और झंझट से बेहतर है कि वहां जाकर नया कुत्ता पाल लें। लेकिन दंपत्ति ने साफ कह दिया कि स्काई कोई सामान नहीं, बल्कि उनका बच्चा है।
दुबई बना इंतजार का ठिकाना
नियमों के चलते स्काई को छह महीने तक दुबई में रहना पड़ा। दंपत्ति ने शुरुआत में खुद भी एक महीने दुबई में रहकर स्काई की देखभाल की। जब उन्हें भरोसा हो गया कि स्काई वहां सुरक्षित है, तब वे ऑस्ट्रेलिया चले गए। इसके बाद अगले पांच महीने उन्होंने फोन और वीडियो कॉल के जरिए स्काई की हर छोटी बड़ी खबर ली। हर दिन उनके लिए इंतजार और चिंता से भरा रहा।
भावनात्मक दूरी सबसे बड़ी पीड़ा
दंपत्ति का कहना है कि पैसों से ज्यादा मुश्किल स्काई से दूर रहना था। वे बताते हैं कि घर सूना लगने लगा था और हर दिन यही सोचते थे कि स्काई कब उनके पास आएगा। आखिरकार छह महीने बाद जब स्काई ऑस्ट्रेलिया पहुंचा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह पल उनके लिए किसी त्योहार से कम नहीं था।
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15 लाख का खर्च लेकिन कोई पछतावा नहीं
हैदराबाद से दुबई और फिर ऑस्ट्रेलिया तक स्काई को लाने में करीब 15 लाख रुपए खर्च हुए। इसमें फ्लाइट, देखभाल और जरूरी कागजी प्रक्रिया शामिल थी। दंपत्ति का कहना है कि यह रकम भले ही बड़ी हो, लेकिन उन्हें कोई अफसोस नहीं है। उनके लिए सबसे जरूरी था कि उनका बच्चा सुरक्षित और उनके साथ रहे।
सोशल मीडिया पर मिल रही तारीफ
इस पूरी कहानी को दंपत्ति ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गई। लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि स्काई वाकई बहुत खुशकिस्मत है, जिसे ऐसे माता-पिता मिले। कई यूजर्स ने इसे सच्चे प्यार की मिसाल बताया है। यह कहानी बताती है कि रिश्ता खून से नहीं, बल्कि दिल से बनता है।