NEET UG 2026 Re-Exam Result: मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET-UG 2026 री-एग्जाम का परिणाम आने के बाद एनटीए के खिलाफ लगभग 100 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गई हैं। देश के अलग-अलग कोर्ट में इन याचिकाओं को निपटाने का काम किया जा रहा है। इसी सबके बीच नीट की OMR शीट पर सवाल उठाने पर एक उम्मीदवार पर कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। दलअसल, ओएमआर आसंर शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया और याचिकार्ता के ऊपर एक लाख का जुर्माना लगाया है। गौरतलब है कि स्कैन की गई ओएमआर शीट और ओरिजिनल ओएमआर सीट में कोई अंतर नहीं मिला, जिसके बाद कोर्ट ने इसे अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग माना है।
एआई की मदद से ओएमआर शीट को न करें एडिट: NTA
एनटीए को देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में चल रहे कई मामलों में राहत मिली है। एनटीए ने दलीलों में कहा कि मूल्यांकन मूल ओएमआर शीट के आदार पर होता है। जबकि री एग्जाम या मूल्यांकन के दौरान किसी भी ओएमआर शीट के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं गई है। एनटीए ने छात्रों से अपील की है कि एआई की मगग से ओएमआर शीट को एडिट करने की कोशिश कतई न करें। क्योंकि एनटीए के पास ओरिजिनल आंसर शीट होती है और एनटीए ने कोर्ट में मूल आंसर शीट पेश की है, जिसके बाद ही फैसला सुनाया गया है।
आखिर क्या है NEET UG री एग्जाम का विवाद?
दरअसल, नीट-यूजी का पेपर रद्द होने के बाद जब री एग्जाम हुआ तो उसके परिणाम पर कई छात्रों के द्वारा सवाल उठाए गए। कई छात्रों ने इसमें गड़बड़ी के आरोप लगाए। री एग्जाम का परिणाम आने के बाद कई स्कैन आंसर शीट भी वायरल हुईं। छात्रों का कहना है कि जो आसंर शीट स्कैन हुई मिली उसमें नंबर काफी कम थे, जबकि नंबर ज्यादा होने चाहिए थे।
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इन उम्मीदवारों पर भी होगी कार्रवाई
एनटीए का कहना है कि नकली या जाली ओएमआर आंसप शीट बनाना एक कानूनी अपराध है। एक्ट 2024 के तहत और भारतीय न्याय संहिता 2023 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दो मामलों का निपटारा हुआ है। इसके अलावा उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, कलकत्ता और बॉम्बे हाई कोर्ट समेत कई हाई कोर्ट में याचिकाओं का निपटारा किया जा रहा है। लेकिन अभी कई मामले अदालत में हैं। बता दें कि स्कैन की गई आंसर शीट और रिस्पांस छात्रों को ई-मेल के जरिए भेजे जा रहे हैं।