आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ शॉपिंग का जरिया नहीं रहा, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। टिकट बुकिंग हो, ऑनलाइन खरीदारी हो या बड़े भुगतान, हर जगह कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है। ऐसे में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इनकम टैक्स के नए नियम आपके लिए अहम साबित हो सकते हैं। अगर आप कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो इन बदलावों को समझना जरूरी है।
हाई वैल्यू कैश पेमेंट पर नजर
सबसे बड़ा बदलाव बड़े भुगतान को लेकर है। अगर किसी एक वित्त वर्ष में आपने एक या ज्यादा क्रेडिट कार्ड के बिल का कुल 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा भुगतान नकद में किया, तो इसकी जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी। यानी अब ज्यादा कैश देकर बिल चुकाना सीधे निगरानी में आ सकता है। इसलिए बड़े भुगतान करते समय सावधानी रखना जरूरी है।
10 लाख से ज्यादा पेमेंट भी रिपोर्ट होगा
सिर्फ नकद ही नहीं, बल्कि अगर आप 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का भुगतान किसी भी डिजिटल तरीके से करते हैं, तब भी बैंक या कार्ड कंपनी इसकी सूचना विभाग को देगी। ऐसे बड़े लेनदेन अब ऑटोमैटिक सिस्टम में दर्ज होंगे। इसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर रखना है।
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एड्रेस प्रूफ के नियम हुए सख्त
पैन कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के दौरान अगर आप क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को एड्रेस प्रूफ के रूप में देते हैं, तो ध्यान रखें कि वह तीन महीने से ज्यादा पुराना न हो। पुराने स्टेटमेंट अब मान्य नहीं होंगे। यानी कागजी प्रक्रिया में भी अब ज्यादा सख्ती रखी जाएगी।
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा
सरकार डिजिटल भुगतान को और मजबूत करना चाहती है। अब क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग को टैक्स भुगतान के वैध इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के तौर पर मान्यता दी गई है। इससे टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान होगी। खासकर वे लोग जो ऑनलाइन तरीके से ही अपने सारे काम करते हैं, उनके लिए यह राहत की बात है।
ऑफिशियल कार्ड और पैन अनिवार्य
अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की तरफ से क्रेडिट कार्ड दिया गया है और उसका इस्तेमाल निजी खर्च में होता है, तो उस रकम को टैक्स योग्य लाभ माना जा सकता है। इसके अलावा अब बिना पैन के क्रेडिट कार्ड जारी नहीं होगा। यानी कार्ड लेने से पहले पैन जरूरी रहेगा। साफ है कि 1 अप्रैल से कार्ड इस्तेमाल करने वालों को अपने खर्च और रिकॉर्ड दोनों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।