कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अब आम लोगों के घरों की दीवारों तक असर दिखा सकती हैं। बाजार से आ रही संकेतों के मुताबिक अगर क्रूड ऑयल के दाम मौजूदा ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो भारत में पेंट की कीमतों में अप्रैल से बढ़ोतरी देखी जा सकती है। रिसर्च फर्म Systematix Research की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि पेंट कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम 2 से 5 फीसदी तक बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं। फिलहाल किसी भी कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कीमत बढ़ाने का ऐलान नहीं किया है, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
कंपनियां मार्च तक कर सकती हैं इंतजार
रिपोर्ट के अनुसार पेंट कंपनियां जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि कंपनियां मार्च 2026 तक इंतजार कर सकती हैं ताकि यह साफ हो सके कि कच्चे तेल की कीमतें आगे किस दिशा में जाती हैं और इनका उत्पादन लागत पर कितना असर पड़ता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर काम करना मुश्किल हो सकता है।
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लागत का दबाव बढ़ा तो सीमित बढ़ोतरी संभव
विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो पेंट कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला ले सकती हैं, लेकिन यह बढ़ोतरी शुरुआत में सीमित ही रहने की संभावना है। पेंट सेक्टर में प्रतिस्पर्धा काफी ज्यादा है, इसलिए कंपनियां अचानक बड़ा इजाफा करने से बच सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कीमतों में बदलाव धीरे-धीरे लागू किया जा सकता है ताकि बाजार और ग्राहकों पर ज्यादा दबाव न पड़े।
FY27 की पहली तिमाही में दिख सकता है असर
रिपोर्ट के मुताबिक कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का पहला दौर FY27 की पहली तिमाही में देखने को मिल सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो बाद के महीनों में और बढ़ोतरी की गुंजाइश भी बन सकती है। विश्लेषण के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें तिमाही आधार पर करीब 10 फीसदी बढ़ती हैं, तो कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में औसतन लगभग 130 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आ सकती है।
मांग स्थिर, लेकिन सस्ते पेंट की बिक्री तेज
दिलचस्प बात यह है कि लागत के दबाव के बावजूद पेंट इंडस्ट्री में मांग फिलहाल मजबूत बनी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों के डीलरों के मुताबिक कुल मांग में मिड-सिंगल डिजिट की ग्रोथ देखी जा रही है। हालांकि बाजार में सस्ते सेगमेंट के पेंट, जैसे इकॉनमी इमल्शन और डिस्टेंपर की बिक्री प्रीमियम और लग्जरी प्रोडक्ट्स के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि उपभोक्ता खर्च को लेकर सावधानी बरत रहे हैं और किफायती विकल्पों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं।