मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेतों के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान तेल के दाम करीब 7 प्रतिशत तक फिसलकर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए। हालांकि बाद में कीमतों में कुछ रिकवरी भी देखने को मिली।
तनाव घटने से सप्लाई की चिंता कम हुई
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका ने लगातार दूसरी रात ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं की, जबकि ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई सीमित रहने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत की खबरों से सप्लाई बाधित होने की आशंकाएं कम हुईं। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
महीनेभर में अब भी ऊंचे हैं दाम
विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार की गिरावट के बावजूद इस महीने कच्चे तेल की कीमतें अभी भी पहले की तुलना में करीब 40 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं। इसकी वजह मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई रूट को लेकर बनी अनिश्चितता है।
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ब्रेंट, WTI और मुरबान के भाव गिरे
सोमवार सुबह कारोबार के दौरान WTI Crude करीब 85.55 डॉलर प्रति बैरल, Brent Crude लगभग 93.06 डॉलर प्रति बैरल और Murban Crude करीब 97.05 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। तीनों प्रमुख बेंचमार्क में गिरावट दर्ज की गई।
तीनों क्रूड ऑयल में क्या है अंतर?
WTI, Brent और Murban दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल बेंचमार्क हैं। WTI अमेरिका का, Brent उत्तरी सागर का और Murban अबू धाबी का कच्चा तेल माना जाता है। इनकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षेत्र और प्रमुख बाजार अलग-अलग होने के कारण इनके दामों में भी अंतर देखने को मिलता है।
बाजार की नजर आगे के घटनाक्रम पर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि तनाव फिर बढ़ता है तो कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि हालात सामान्य रहने पर बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है।