ग्रेटर नोएडा। जिले में खेती की जमीन लगातार कम होती जा रही है। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग और रिहायशी सेक्टरों के विस्तार के बीच अब बागवानी विभाग ने खेती का नया विकल्प तलाशा है। विभाग ने घोषणा की है कि जिले में ग्रो बैग के जरिए फल और सब्जियों की खेती की जाएगी। इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गौतम बुद्ध नगर में शुरू किया जा रहा है। यदि योजना सफल रहती है तो इसे अन्य जिलों के शहरी इलाकों में भी लागू किया जाएगा।
नई तकनीक से खेती का विकल्प
शहर में जगह की कमी के कारण लोग खेती और बागवानी के लिए नई तकनीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सेक्टरों और सोसाइटियों में रहने वाले लोग विभाग से संपर्क कर रहे हैं ताकि वे छतों और बालकनियों पर खेती कर सकें। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ग्रो बैग खेती को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।
ग्रो बैग क्या है
ग्रो बैग एक विशेष प्रकार का बैग होता है जो पौधों की जड़ों को सांस लेने की सुविधा देता है। यह जूट, कपड़े या मोटे प्लास्टिक से बना होता है। इसमें नमी का स्तर संतुलित रहता है, जिससे पौधे तेजी से और स्वस्थ तरीके से बढ़ते हैं। इनका इस्तेमाल छतों, बालकनियों और छोटे बगीचों में किया जा सकता है।
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ग्रो बैग खेती के फायदे
ग्रो बैग में खेती कम जगह में आसानी से संभव है। पानी की खपत कम होती है और खरपतवार न होने के कारण पौधों की देखभाल भी कम करनी पड़ती है।
सरकार की योजना
ग्रो बैग के जरिए जिले में रूफटॉप गार्डन बनाए जाएंगे। इसके लिए विभाग द्वारा मज़बूत बैग, मिट्टी, खाद और बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। बागवानी विभाग की सहायक निरीक्षक ऋचा शर्मा ने बताया कि इस योजना के लिए एक कमेटी बनाई जा रही है। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी सेक्टरों और सोसाइटियों में भी लोग ग्रो बैग का इस्तेमाल करके फल और सब्जियां उगाते हुए दिखाई देंगे।