D2M Trail: भारत में बिना इंटरनेट स्मार्टफोन पर लाइव वीडियो और टीवी चलाने वाली D2M (Direct-to-Mobile) तकनीक का ट्रायल पूरा हो गया है। एक्सचेंज4मीडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, टेस्टिंग में तेजस के MarkOne D2M हैंडसेट का उपयोग किया गया था, जो 470-582MHz स्पेक्ट्रम बैंड के भीतर ATSC 3.0 स्टैंडर्ड पर काम करता है। इस तकनीक के आने के बाद अब स्मार्टफोन यूजर्स बिना सिम कार्ड और बिना मोबाइल डेटा (Internet) के भी लाइव टीवी चैनल, क्रिकेट मैच और हाई-क्वालिटी वीडियो देख सकेंगे।
क्या था ट्रायल का मकसद?
Tejas Networks द्वारा विकसित D2M उपकरणों का दिल्ली में कई मंत्रालयों की देखरेख में परीक्षण किया गया। इस परीक्षण का मुख्य मकसद यह देखना था कि ट्रांसमीटर सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। इसके साथ ही क्या यह नई तकनीक हमारे फोन के मौजूदा नेटवर्क जैसे 4G और 5G के काम में कोई रुकावट तो नहीं डाल रही?
ट्रायल रहा सफल
रिपोर्ट के अनुसार,यह ट्रायल सफल रहा क्योंकि D2M सिग्नल ने मौजूदा 4G या 5G नेटवर्क में कोई बाधा पैदा नहीं की। इस टेस्टिंग से ये भी पता चल गया कि नई तकनीक वाले उपकरण जैसे रिसीवर, डोंगल, स्मार्टफोन और होम गेटवे पूरी तरह मजबूत और सही हैं। इस सिग्नल को बिना किसी रुकावट के पकड़ सकते हैं।
यह भी पढ़ें: Oneplus New Launch: वनप्लस ने Nord CE 6 और CE 6 Lite को भारत में किया लॉन्च, जानें कितनी है कीमत और क्या है खासियत
बातचीत करने में नहीं आई रुकावट
टेस्टिंग में पाया गया कि ब्रॉडकास्ट स्ट्रीम के दौरान भी वॉइस कॉल और SMS को प्राथमिकता मिलती है। इससे ये भी कन्फर्म हो गया है कि टीवी वाले सिग्नल (ब्रॉडकास्ट) की वजह से फोन पर बातचीत करने या इंटरनेट चलाने वाली जरूरी सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आएगी। रिपोर्ट के अनुसार, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT) और प्रसार भारती के टॉप अधिकारियों ने ट्रायल का नेतृत्व किया।
क्या है D2M टेक्नोलॉजी?
बता दें कि D2M या डायरेक्ट-टू-मोबाइल एक ऐसी तकनीक है, जो ऑडियो और वीडियो कंटेंट को बिना इंटरनेट के सीधे स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे आम डिवाइस पर भेज सकती है। ये तकनीक ठीक उसी तरह काम करती है जैसे आपके घर का FM रेडियो या DTH काम करता है। इसमें मोबाइल टावरों के बजाय ब्रॉडकास्ट टावरों से सीधे आपके फोन में सिग्नल आते हैं। इसके लिए मोबाइल में एक छोटी चिप (Receiver) की जरूरत होती है।