दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने नर्सरी से लेकर कक्षा पांच तक के बच्चों के स्कूल बंद रखने का फैसला लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए इसमें दखल देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने माना कि छोटे बच्चों की सेहत सबसे ज्यादा खतरे में है और उन्हें जहरीली हवा से बचाना सरकार की पहली जिम्मेदारी है। इसलिए फिलहाल स्कूल बंद रखने का फैसला जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को बेहद गंभीर समस्या बताया। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अब तक प्रदूषण रोकने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, वे नाकाफी साबित हुए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि छोटे-मोटे उपायों से अब काम नहीं चलेगा। प्रदूषण को कम करने के लिए एक ठोस और व्यापक योजना की जरूरत है। कोर्ट ने यह भी माना कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ रहा है, इसलिए एहतियात जरूरी है।
पुराने वाहनों पर बढ़ेगी सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को प्रदूषण पर सख्त कदम उठाने की खुली छूट दी है। कोर्ट ने कहा कि अब BS-IV से नीचे के मानकों वाले पुराने वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले सिर्फ BS-III से नीचे के वाहनों पर रोक थी, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण दायरा बढ़ा दिया गया है। कोर्ट का मानना है कि पुराने वाहन प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी वजह हैं और इन्हें सड़कों से हटाना जरूरी है। इससे हवा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
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मजदूरों के लिए राहत का निर्देश
प्रदूषण प्रतिबंधों की वजह से कई मजदूरों का काम प्रभावित हुआ है। इसको लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा है कि ऐसे मजदूरों की पहचान कर उनका वेरिफिकेशन किया जाए। इसके बाद उनके बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता भेजी जाए, ताकि उन्हें रोजमर्रा की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। वहीं सरकार ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चे घर के अंदर ही रहें और प्रदूषण से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाएं।