कानपुर में साइबर ठगों ने ऐसा खेल शुरू किया है जिसने पूरे शहर को दहशत में डाल दिया है। दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट केस की दहशत का सहारा लेकर ठगों ने फोन पर लोगों को इतना डराया कि कई लोग बुरी तरह भ्रमित हो गए। यही नहीं आपका नंबर दिल्ली ब्लास्ट में पकड़ा गया है जैसी लाइन सुनकर लोग समझ ही नहीं पाए कि सच क्या है और साजिश क्या। इसी दहशत के बीच कानपुर की एक महिला से ठगों ने 6.66 लाख रुपये तक वसूल लिए, जबकि दो और लोग बाल-बाल बचे। पुलिस अब इस नए साइबर गेम को शहर का सबसे खतरनाक फ्रॉड बता रही है।
आपका मोबाइल नंबर दिल्ली विस्फोट में इस्तेमाल
सबसे बड़ा मामला कलेक्ट्रेट की ओर रहने वाली सुनीता गौड़ का है। सुनीता के पास 9 नवंबर से लगातार दो दिन कॉल आई पहले दिन खुद को ATS अधिकारी बताया गया, अगले दिन NIA अधिकारी बनकर धमकाया गया। ठगों ने कहा कि आपका मोबाइल नंबर दिल्ली विस्फोट में इस्तेमाल हुआ है, आपकी लोकेशन ATS के पास है, अगर तुरंत जांच में सहयोग नहीं किया तो आपको और परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” सुनीता इतनी घबरा गईं कि बिना किसी को बताए वीडियो कॉल पर कई घंटों तक ठगों के दबाव में रहीं और फिर RTGS के जरिए 6 लाख 66 हजार रुपये ठगों के खाते में भेज दिए। इसके बाद जब उन्होंने परिवार को बताया तो सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
डिजिटल अरेस्ट नाम की नई टर्म का इस्तेमाल
सबसे हैरानी की बात यह है कि ठग अब डिजिटल अरेस्ट नाम की नई टर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे वीडियो कॉल पर पीड़ित को ऐसे डराते हैं जैसे किसी स्पेशल ऑपरेशन की जांच चल रही हो। यह भी कहा जाता है कि "आप कमरे से बाहर नहीं जा सकतीं, आपका कैमरा ऑन रहेगा, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है"। जबकि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज होती ही नहीं। लेकिन लाल किला केस की दहशत का फायदा उठाकर ठग लोगों को यकीन दिला रहे हैं कि वे किसी बड़ी आतंकी जांच में फंस चुके हैं।
तीन लोगों के पास आई कॉल्स
कानपुर में सुनीता अकेली नहीं हैं। गोविंदनगर के पंकज चड्ढा और विजयनगर के रिटायर्ड बैंक अधिकारी सी.के. तिवारी को भी इसी तरह का कॉल आया था। कॉलर ने कहा कि उनके नाम पर एक पार्सल पकड़ा गया है जिसमें नशीला पदार्थ और नकली ID मिली है। खुद को ATS इंस्पेक्टर बताने वाले ठग ने उनसे भी वीडियो कॉल की मांग की, लेकिन दोनों लोगों ने शक होने पर कॉल काट दिया इससे वे बच गए। पुलिस का कहना है कि अगर वे कुछ मिनट और बात कर लेते तो लाखों रुपये की ठगी पक्की थी।
कॉलर VOIP नंबर का इस्तेमाल कर रहे
साइबर टीम ने प्राथमिक जांच में पता लगाया है कि कॉलर VOIP नंबर का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके। ठग दिल्ली ब्लास्ट की दहशत का फायदा इसलिए ले रहे हैं क्योंकि लोग पहले से ही तनाव में हैं। इसी डर के कारण उनसे UPI, RTGS, बैंक डिटेल और OTP जैसी संवेदनशील जानकारी आसानी से निकलवाना आसान हो जाता है। एडीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा ने साफ कहा है इस समय जो कॉल आ रहे हैं, वे देशभर के सबसे खतरनाक फ्रॉड में से एक हैं। यह पूरा रैकेट संगठित तरीके से काम कर रहा है। जांच शुरू कर दी गई है और खातों की पूरी ट्रेल निकाली जा रही है.
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पुलिस ने शहर को किया अलर्ट जारी
पुलिस ने शहर में अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगर किसी को भी कोई कॉल आए जिसमें उसे एटीएस, एनआईए, ईडी, सीबीआई अधिकारी बताया जाए, किसी केस में नाम आने का दावा किया जाए या किसी खाते में पैसे डालने को कहा जाए तो तुरंत थाने में सूचना दें। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह ठगी और बढ़ सकती है क्योंकि ठग हर बड़े हादसे को अपना हथियार बना लेते हैं। कानपुर में जिस तरह तीन लोगों को निशाना बनाया गया उससे साफ है कि ठगों का यह नया खेल अभी शुरू हुआ है, और सतर्क न रहने पर कोई भी इसकी अगली शिकार बन सकता है।