Delhi Dehradun Expressway ANPR : दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहन चलाना अब जेब पर भारी पड़ सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बताया है कि NHAI की ओर से लगाए गए ANPR कैमरों को ट्रैफिक ई-चालान सिस्टम से जोड़ दिया गया है। अब कोई वाहन तय गति सीमा से ज्यादा तेज चलता है तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट रिकॉर्ड करेगा और नियम तोड़ने वाले वाहन का ई-चालान सीधे दर्ज हो जाएगा।
हजार से ज्यादा चालान जारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीडिंग के मामलों में कार्रवाई तेज हो गई है। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, कैमरों और ई-चालान सिस्टम के इंटीग्रेशन के बाद अब तक 1,000 से ज्यादा चालान और नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पुलिस का मानना है कि हाई-स्पीड कॉरिडोर पर लगातार निगरानी से तेज रफ्तार पर नियंत्रण होगा और सड़क हादसों को कम करने में मदद मिलेगी।
कहां कितनी है स्पीड लिमिट
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के मुख्य हिस्से पर कार और हल्के वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जबकि बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए यह सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि अलग-अलग हिस्सों में परिस्थितियों के अनुसार स्पीड लिमिट अलग है। दिल्ली सीमा में अक्षरधाम के आसपास कारों के लिए 70 और भारी वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा है। वहीं देहरादून के पास करीब 12 किलोमीटर के वाइल्डलाइफ कॉरिडोर में सभी वाहनों के लिए गति सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है।
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इन जगहों पर कैमरों की नजर
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर ओवरस्पीड कैमरे लगाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस के मैप में चार प्रमुख स्थानों को चिह्नित किया गया है। इनमें दिल्ली-गाजियाबाद के पास एक्सप्रेसवे की शुरुआत वाला हिस्सा, बागपत-शामली के आसपास का मध्य क्षेत्र, शिवालिक पहाड़ियों के पास मोहंड और हरिद्वार-रुड़की से देहरादून की ओर जाने वाला हिस्सा शामिल है। इन जगहों पर गुजरने वाले वाहनों की गति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
दूसरे नियम भी कैमरे पकड़ेंगे
निगरानी सिर्फ ओवरस्पीडिंग तक सीमित नहीं रहने वाली है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, आगे इस सिस्टम के जरिए एक्सप्रेसवे पर प्रतिबंधित वाहनों की पहचान कर कार्रवाई करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे पहले द्वारका एक्सप्रेसवे पर भी ANPR कैमरों को ई-चालान सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। हाई-स्पीड कॉरिडोर पर तकनीक आधारित निगरानी बढ़ने से वाहन चालकों को स्पीड लिमिट और अन्य ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी होगा।