राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए बड़ा फैसला लागू कर दिया गया है। अब कमर्शियल वाहनों के लिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क यानी ईसीसी में भारी बढ़ोतरी की गई है। अलग-अलग श्रेणियों की गाड़ियों पर 600 से 1400 रुपये तक शुल्क बढ़ाया गया है। साथ ही हर साल इन दरों में 5 फीसदी बढ़ोतरी का नियम भी लागू कर दिया गया है, जिससे आने वाले समय में यह खर्च और बढ़ेगा।
किस गाड़ी पर कितना शुल्क
नई व्यवस्था के तहत हल्की कमर्शियल गाड़ियां और दो एक्सल ट्रकों के लिए शुल्क 1400 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है। वहीं तीन एक्सल और चार या उससे अधिक एक्सल वाले ट्रकों के लिए यह शुल्क 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये तक पहुंच गया है। यानी अब दिल्ली में घुसना पहले से काफी महंगा हो गया है।
फैसले के पीछे क्या वजह
यह फैसला प्रदूषण पर नियंत्रण के मकसद से लिया गया है। दरअसल, पहले कम शुल्क होने की वजह से कई भारी वाहन एक्सप्रेसवे छोड़कर सीधे दिल्ली के रास्ते गुजर रहे थे। इससे राजधानी में ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे थे। अब सरकार चाहती है कि ऐसे वाहन बाहरी एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करें और शहर के अंदर कम प्रवेश करें।
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कोर्ट और विशेषज्ञों की सलाह
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा हो चुकी है, जहां यह सुझाव दिया गया था कि गैर जरूरी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश से रोका जाए। इसी आधार पर यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नाराजगी
हालांकि इस फैसले से ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नाराजगी भी देखी जा रही है। कई संगठनों ने शुल्क बढ़ाने का विरोध किया है और इसे कारोबार पर अतिरिक्त बोझ बताया है। उनका कहना है कि इससे लागत बढ़ेगी और इसका असर सीधे व्यापार पर पड़ेगा।
आम लोगों पर असर तय
इस फैसले का असर आम जनता की जेब पर भी पड़ सकता है। कमर्शियल वाहनों के बढ़े खर्च को कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में जोड़ सकती हैं। इससे खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। कुल मिलाकर यह कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी माना जा रहा है, लेकिन इसके आर्थिक असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।