गुरुवार को अंतरबैंक बाजार में भारतीय रुपया बड़ी गिरावट के साथ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.01 पर खुला और फिर गिरकर 95.20 तक पहुंच गया। यह 32 पैसे की बड़ी गिरावट है। इससे पहले भी रुपया लगातार दबाव में था और बुधवार को 94.88 पर बंद हुआ था।
डॉलर की मजबूती बना बड़ा कारण
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती रुपये पर भारी पड़ रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद डॉलर की मांग और बढ़ गई है। निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे अन्य मुद्राओं पर दबाव बन रहा है।
तेल की कीमतों ने बढ़ाया संकट
इस गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
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विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक भी सतर्क हो गए हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। निवेशकों के बाहर निकलने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है और गिरावट तेज हो रही है।
आगे और गिर सकता है रुपया
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि अगर मौजूदा हालात बने रहे, तो रुपया और कमजोर हो सकता है। खासकर अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और डॉलर मजबूत रहता है, तो आने वाले दिनों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। आयात महंगा होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल और अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई का दबाव बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर रुपये की यह गिरावट आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।