दिल्ली में नई आबकारी नीति अब तक तैयार नहीं हो सकी है। पिछले तीन साल से इस पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली। ऐसे में सरकार मौजूदा शराब नीति को फिर से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि नई नीति को लागू करने में अभी और समय लग सकता है।
31 मार्च को खत्म हो रही मौजूदा व्यवस्था
अभी जो नीति लागू है, उसे अगस्त 2025 में नौ महीने के लिए बढ़ाया गया था। यह 31 मार्च को खत्म होने वाली है। अगर इसे समय रहते आगे नहीं बढ़ाया गया तो शराब की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। आबकारी विभाग ने प्रस्ताव दिया है कि इस नीति को मार्च 2027 तक बढ़ा दिया जाए। अगर ऐसा हुआ तो यह अब तक का सबसे लंबा विस्तार होगा।
कारोबार में बनी अनिश्चितता
शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नई नीति में देरी से बाजार में असमंजस बना हुआ है। पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने अपनी नीतियां समय पर घोषित कर दी हैं। कई राज्यों में दो से चार साल की स्थायी नीति होती है, जिससे कारोबार में स्थिरता रहती है। उद्योग संगठनों का मानना है कि दिल्ली में भी साफ और लंबी अवधि की नीति जरूरी है।
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पुरानी नीति पर क्यों लौटना पड़ा
सितंबर 2022 से दिल्ली में पुरानी व्यवस्था लागू है। इससे पहले 2021-22 की नीति को अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीतिक विवाद के बाद सरकार ने पुरानी व्यवस्था दोबारा लागू की थी। नई नीति 2022 के अंत तक आने की उम्मीद थी, लेकिन चुनाव और जांच प्रक्रिया के चलते इसमें लगातार देरी होती गई।
नई सरकार का मसौदा तैयार
फरवरी 2025 में सत्ता में आई नई सरकार ने नई नीति का मसौदा तैयार किया है। इसमें सरकारी दुकानों को आधुनिक और बड़े प्रारूप में खोलने का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि इस मसौदे को अभी कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है। जब तक मंजूरी नहीं मिलती, खुदरा बिक्री सरकारी दुकानों के जरिए ही जारी रहने की संभावना है।
आगे क्या हो सकता है फैसला
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार मार्च से पहले क्या फैसला लेती है। अगर पुरानी नीति को फिर बढ़ाया गया तो नई व्यवस्था लागू होने में और देरी होगी। कारोबार, राजस्व और सप्लाई की स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर स्थिति साफ हो सकती है।