Delhi gets relief from waterlogging: दिल्ली में हर मॉनसून के दौरान होने वाले जलभराव से स्थायी राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत बड़े कदम उठाए हैं। सरकार चार प्रमुख नालों के विकास और विस्तार पर तेजी से काम कर रही है, जिससे सीवर ओवरफ्लो और जलजमाव जैसी समस्याओं से राजधानी को निजात मिल सके।
पुरानी व्यवस्था में बदलाव
सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली का ड्रेनेज मास्टर प्लान 1970 के दशक में तैयार हुआ था, लेकिन बढ़ती आबादी और शहरीकरण के अनुरूप उसमें जरूरी सुधार नहीं हो सके। अब सरकार ने राजधानी की भौगोलिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलनिकासी व्यवस्था को आधुनिक बनाने का फैसला किया है।
220 करोड़ की परियोजना
किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई क्षेत्रों की समस्या के समाधान के लिए 4.5 किलोमीटर लंबा ट्रंक ड्रेन बनाया जा रहा है। इसकी लागत करीब 220.93 करोड़ रुपये है। यह ड्रेन 1,520 एकड़ क्षेत्र के बारिश के पानी को संभालने में सक्षम होगा और रेलवे कॉरिडोर के साथ सप्लीमेंट्री ड्रेन से जुड़ेगा।
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बड़े स्तर पर सुधार
लाडो सराय से पुल प्रह्लादपुर तक एमबी रोड स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना पर 387.84 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 22.76 किलोमीटर लंबे इस ड्रेन नेटवर्क को ढाई साल में पूरा किया जाएगा। इससे लंबे समय से जलभराव झेल रहे इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
समग्र समाधान की तैयारी
किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन और रोहतक रोड पर स्टॉर्म वॉटर ड्रेन सुधार कार्य भी तेज हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली के बड़े हिस्से में मॉनसून के दौरान जलभराव की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है।