Delhi High Court jolt to Raja Bhaiya: उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह को घरेलू हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह की ओर से दायर याचिका पर निचली अदालत द्वारा जारी समन को सही ठहराते हुए उसे रद्द करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा कानून के तहत दायर मामलों की सुनवाई के लिए राउज एवेन्यू स्थित सांसद-विधायक अदालत सक्षम है और उसके अधिकार क्षेत्र पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।
अदालत ने अधिकार क्षेत्र पर उठाई गई आपत्ति खारिज की
सुनवाई के दौरान राजा भैया की ओर से दलील दी गई थी कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला साकेत की सक्षम अदालत में चलना चाहिए था और सांसद-विधायक मामलों के लिए गठित विशेष अदालत को इसकी सुनवाई का अधिकार नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि संबंधित अदालत एक सक्षम मजिस्ट्रेट कोर्ट के रूप में कार्य कर रही है तथा वर्तमान विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर सकती है।
विशेष अदालतों के उद्देश्य पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष अदालतों का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामले लंबे समय तक लंबित न रहें। न्यायपालिका में जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों का समयबद्ध निपटारा आवश्यक है।
घरेलू हिंसा कानून में आपराधिक प्रावधान भी शामिल
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मिलने वाली राहतें भले ही अधिकांशतः नागरिक प्रकृति की हों, लेकिन इसमें आपराधिक प्रवर्तन संबंधी प्रावधान भी मौजूद हैं। संरक्षण आदेश का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान इसी का उदाहरण है। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों की कार्यवाही दंड प्रक्रिया संहिता के तहत संचालित होती है और इन्हें न्यायिक या महानगरीय मजिस्ट्रेट द्वारा ही सुना जाता है।
वैवाहिक विवाद से जुड़ा है मामला
राजा भैया और उनकी पत्नी के बीच लंबे समय से वैवाहिक विवाद चल रहा है। करीब 28 वर्षों की शादी के बाद दोनों के बीच तलाक का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन है। पत्नी ने घरेलू हिंसा, वैवाहिक संबंधों में कथित प्रताड़ना, आर्थिक अनियमितताओं और अन्य आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में आगे बढ़ेगी और समन जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।