Private School Fees: दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों में स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति (SLFRC) के गठन को लेकर दिल्ली सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूल वही शुल्क वसूल सकेंगे, जो वे पिछले सत्र 2025-26 में ले रहे थे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है।
फीस यथावत
अदालत ने कहा कि जब तक याचिकाओं पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक स्कूलों को SLFRC बनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सरकार ने एक फरवरी की अधिसूचना में स्कूलों को 10 दिन के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने माना कि फिलहाल इस आदेश के अमल पर रोक रहना उचित है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी स्कूल द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूला जाता है तो उसे कानून के तहत नियंत्रित किया जा सकेगा।
सरकार का आदेश
यह अंतरिम फैसला कई स्कूल संगठनों की याचिकाओं पर सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार का आदेश जल्दबाजी में जारी किया गया और इससे प्रशासनिक जटिलताएं पैदा होंगी। उन्होंने अधिसूचना को चुनौती देते हुए इसके क्रियान्वयन पर रोक की मांग की थी। अदालत ने फिलहाल उनकी दलीलों को ध्यान में रखते हुए राहत प्रदान की है।
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सरकार पर आरोप
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि निजी स्कूल प्रबंधन और सरकार के बीच सांठगांठ है। उन्होंने कहा कि पहले सर्वोच्च न्यायालय में आश्वासन दिया गया था कि नया प्राइवेट फीस कानून 2025-26 की बढ़ी हुई फीस पर लागू नहीं होगा, लेकिन अब इसे 2026-27 सत्र तक प्रभावी कर दिया गया है।
आगे की सुनवाई
उन्होंने दावा किया कि अप्रैल 2025 में की गई फीस वृद्धि वापस नहीं ली जाएगी, जिससे मध्यम वर्गीय अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका कहना है कि कानून बनाते समय अभिभावकों या उनके संगठनों से राय नहीं ली गई। अब सभी की नजर 12 मार्च की अगली सुनवाई पर टिकी है, जब अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।