Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापनों की समय सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को वैध ठहराते हुए ब्रॉडकास्टर्स की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने साफ कहा कि हर घंटे 12 मिनट से ज्यादा विज्ञापन दिखाने पर रोक दर्शकों के हित में है और इसका उद्देश्य टीवी देखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। कोर्ट के इस फैसले से न्यूज, रीजनल और फ्री-टू-एयर चैनलों पर बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि उनकी आय का प्रमुख स्रोत विज्ञापन ही होता है।
TRAI के नियम पर अदालत की मुहर
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने TRAI के 2012 और 2013 के रेगुलेशन को सही माना। इन नियमों के तहत टीवी चैनलों को एक घंटे में अधिकतम 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट सेल्फ प्रमोशनल कंटेंट दिखाने की अनुमति है। अदालत ने कहा कि यह सीमा किसी भी तरह से असंवैधानिक नहीं है और इसे उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखकर लागू किया गया था। कोर्ट ने माना कि लगातार और ज्यादा विज्ञापन दर्शकों के अनुभव को खराब करते हैं।
ब्रॉडकास्टर्स ने क्या दलील दी
कई बड़े न्यूज चैनलों, जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों और रीजनल नेटवर्क्स ने इस नियम को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि विज्ञापन समय सीमित होने से उनकी कमाई प्रभावित होगी और कई चैनलों की आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है। ब्रॉडकास्टर्स ने अदालत में दलील दी कि विज्ञापन भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा हैं और इस तरह की पाबंदी संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन करती है। खासतौर पर फ्री-टू-एयर चैनलों ने इसे अपने अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बताया।
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दर्शकों के हित को प्राथमिकता
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि टीवी दर्शक डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरह विज्ञापनों को आसानी से स्किप नहीं कर सकते, इसलिए जरूरत से ज्यादा विज्ञापन कार्यक्रमों के प्रवाह को बाधित करते हैं। कोर्ट ने माना कि दर्शकों का ध्यान बनाए रखने और बेहतर कंटेंट अनुभव देने के लिए विज्ञापनों की सीमा तय करना जरूरी है। बेंच ने यह भी कहा कि TRAI का नियम व्यावसायिक हित और उपभोक्ता हित के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।
एक दशक पुराने विवाद का अंत
यह मामला पिछले दस वर्षों से अधिक समय से अदालत में लंबित था। साल 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट ने TRAI को चैनलों के खिलाफ कार्रवाई करने से अंतरिम तौर पर रोक दिया था। अब अंतिम फैसले में अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि विज्ञापन सीमा संबंधी नियम पूरी तरह लागू रहेंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद टीवी इंडस्ट्री को अपने राजस्व मॉडल और कंटेंट रणनीति में बदलाव करने पड़ सकते हैं, खासकर उन चैनलों को जो पूरी तरह विज्ञापन आय पर निर्भर हैं।