Delhi High Courts decision: द्वारका कोर्ट के पूर्व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमन प्रताप सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह में जवाब मांगा है। इससे मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है।
हाईकोर्ट ने याचिका कर दी थी खारिज
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अमन प्रताप सिंह की सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह कार्रवाई दंडात्मक नहीं, बल्कि प्रोबेशन पर नियुक्त अधिकारी की उपयुक्तता के आधार पर की गई थी। यानी इसे ‘टर्मिनेशन सिम्पलिसिटर’ माना गया।
प्रदर्शन और व्यवहार बना कारण
हाईकोर्ट के अनुसार, अमन प्रताप सिंह की बर्खास्तगी किसी एक आरोप पर आधारित नहीं थी, बल्कि उनके समग्र कार्य प्रदर्शन और व्यवहार के मूल्यांकन के बाद की गई। एक वायरल वीडियो, जिसमें वे अदालत में वकीलों पर नाराज होते दिखे, इस मामले में अहम कारण बना। इसके अलावा उनके खिलाफ कई शिकायतें भी दर्ज थीं और उनके काम को औसत से कम आंका गया था।
यह भी देखेंःWomens Reservation Controversy: महिला आरक्षण विवाद, राहुल गांधी के घर पर BJP का प्रदर्शन
परिवीक्षा अवधि में हुआ मूल्यांकन
अमन प्रताप सिंह की नियुक्ति 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में हुई थी और वे दो साल की परिवीक्षा अवधि पर थे। इस दौरान अधिकारियों के आचरण, निर्णय क्षमता और पेशेवर व्यवहार का आकलन किया जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर लिया गया फैसला प्रशासनिक संतुष्टि पर आधारित था।
अगली सुनवाई
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी, जहां यह तय होगा कि हाईकोर्ट का फैसला सही था या नहीं। शीर्ष अदालत के नोटिस के बाद दिल्ली हाईकोर्ट को अपना पक्ष रखना होगा, जिससे इस पूरे मामले पर अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।