
दिल्ली में उप-राज्यपाल (LG) के आदेश के खिलाफ वकीलों का विरोध लगातार तेज़ होता जा रहा है. एलजी द्वारा जारी उस नोटिफिकेशन को लेकर दिल्ली की सभी निचली अदालतों में वकील न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर रहे हैं, जिसमें पुलिसकर्मियों को थानों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गवाही देने की अनुमति दी गई है. वकीलों का कहना है कि यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर कर देगी और इससे आम जनता को न्याय मिलना और भी कठिन हो जाएगा.
कड़कड़डूमा कोर्ट में भारी विरोध
शनिवार को कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में वकीलों ने बड़ा प्रदर्शन किया. यहां वकीलों ने पुलिस अधिकारियों और सरकारी वकीलों को अदालत परिसर में प्रवेश तक नहीं करने दिया. वकीलों का कहना है कि जब तक एलजी का यह आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. कई वकील हाथों में प्लेकार्ड लेकर सड़कों पर उतर आए और "काला कानून वापस लो" जैसे नारे लगाए.
शाहदरा बार एसोसिएशन का ऐलान
शाहदरा बार एसोसिएशन के सेक्रेटरी नरवीर डबास ने सभी वकीलों और पक्षकारों को संबोधित करते हुए साफ कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी या सरकारी वकील को अदालत में घुसने नहीं दिया जाएगा. उनका कहना है कि अगर पुलिस थानों से गवाहियों का काम शुरू हो जाएगा तो न्याय की निष्पक्षता पर असर पड़ेगा. यह न सिर्फ वकीलों बल्कि आम जनता और पीड़ित पक्षों के हित में भी नुकसानदेह होगा.
22 अगस्त से जारी है बहिष्कार
वकीलों ने 22 अगस्त से न्यायिक कार्यों का बहिष्कार शुरू किया है. दिल्ली की सभी निचली अदालतों की बार एसोसिएशनों के संगठन "कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस" ने इसका आह्वान किया था. कमेटी ने एलजी के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है और साफ किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन इसी तरह चलता रहेगा. वकीलों ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में वो सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे और उप-राज्यपाल कार्यालय का घेराव भी करेंगे.
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क्यों हो रहा विरोध?
दरअसल दिल्ली के उप-राज्यपाल ने 13 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी किया था. इसमें कहा गया था कि पुलिसकर्मी थानों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गवाही दे सकते हैं और इसके लिए कुछ निश्चित स्थान भी तय किए गए हैं. वकीलों का मानना है कि यह फैसला न्यायिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला है और इससे अदालतों की प्रक्रिया प्रभावित होगी. उनका कहना है कि इससे पुलिस और गवाहों पर दबाव डाला जा सकता है और पीड़ित पक्ष को निष्पक्ष न्याय नहीं मिल पाएगा.
कोऑर्डिनेशन कमेटी की आपत्ति
कोऑर्डिनेशन कमेटी ने इस आदेश का विरोध करते हुए 20 अगस्त को उप-राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था. पत्र में कहा गया कि यह आदेश केंद्रीय गृह सचिव के 15 जुलाई 2024 के सर्कुलर के खिलाफ है. उस सर्कुलर में साफ कहा गया था कि पुलिस थानों में किसी भी तरह की गवाही नहीं ली जा सकती. वकीलों ने अपने पत्र में एलजी से 48 घंटों के अंदर आदेश वापस लेने की अपील की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
राऊज एवेन्यू कोर्ट में भी प्रदर्शन
कड़कड़डूमा कोर्ट ही नहीं, बल्कि राऊज एवेन्यू कोर्ट के वकीलों ने भी एलजी के आदेश के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. यहां भी वकीलों ने अदालत परिसर में प्रवेश द्वार पर नारेबाजी की और प्लेकार्ड लगाकर "काला कानून वापस लो" की मांग की. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को बचाने के लिए यह आंदोलन ज़रूरी है.
आंदोलन तेज़ करने की तैयारी
वकीलों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ उनके हितों के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए है. अगर गवाही थानों से होने लगी तो अदालतों में न्याय की पारदर्शिता खत्म हो जाएगी. इसी कारण से उन्होंने इस आंदोलन को और बड़ा करने की घोषणा की है. आने वाले दिनों में दिल्ली की अलग-अलग अदालतों और सड़कों पर यह विरोध और तेज़ होता नजर आ सकता है.