
दिल्ली की गलियों और मोहल्लों में शराब की दुकानों से जुड़ी अव्यवस्था अब खत्म होने वाली है, क्योंकि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने राजधानी में नई एक्साइज पॉलिसी लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब शराब की दुकानों को गली-मोहल्लों से हटाकर मुख्य सड़कों और व्यावसायिक इलाकों में शिफ्ट करने जा रही है. इस कदम से न केवल व्यवस्था सुधरेगी बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और स्थानीय शांति को लेकर हो रही शिकायतों का भी अंत होगा. सूत्रों के मुताबिक, नई पॉलिसी को लेकर मसौदा तैयार हो चुका है और बस अब सरकारी मंजूरी का इंतजार है. रेखा सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब दिल्ली में शराब की बिक्री पूरी तरह नियंत्रण में होगी.
स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों से दूरी !
नई नीति के तहत शराब की रिटेल बिक्री का अधिकार सिर्फ सरकारी संस्थाओं के पास रहेगा यानी अब निजी कंपनियां शराब की दुकानें नहीं चला सकेंगी. बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार के चार निगम दिल्ली स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन, दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन समेत अन्य एजेंसियां पूरे शहर में शराब की बिक्री का संचालन करेंगी. इस फैसले का मकसद मुनाफे के बजाय नियंत्रण और पारदर्शिता पर ध्यान देना है. इससे अवैध बिक्री और ओवरप्राइसिंग जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगेगी. साथ ही, शराब की दुकानों को अब स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों से दूरी बनाए रखना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि सामाजिक वातावरण पर इसका असर न पड़े.
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ड्राफ्ट हाई लेवल कमिटी ने तैयार किया !
सूत्रों के मुताबिक, नई एक्साइज पॉलिसी का ड्राफ्ट हाई लेवल कमिटी ने तैयार किया है और इसे अंतिम मंजूरी के लिए जल्द पेश किया जाएगा. सरकार का ध्यान इस बात पर है कि राजधानी में शराब की उपलब्धता सीमित रहे, लेकिन जो लोग खरीदना चाहते हैं, उन्हें नियंत्रित और सुरक्षित जगहों पर सुविधा मिले. दुकानों को अब शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल्स या व्यावसायिक हब में शिफ्ट किया जाएगा. इससे भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाकों से शराब की दुकानों का बोझ हटेगा और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, दावा है कि अगर यह नीति लागू होती है, तो दिल्ली देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जहां शराब बिक्री का पूरा सिस्टम सरकार के हाथों में होगा. इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि उन इलाकों की महिलाएं भी चैन की सांस लेंगी, जहां अब तक शराब की दुकानों के बाहर रोज़ाना हंगामा या विवाद की खबरें आती थीं