दिल्ली में रेखा सरकार के सामने पहली बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. 12 MCD वार्डों के उपचुनाव सिर्फ निगम की सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि राजधानी की सियासी दिशा तय करने वाले नतीजे बन सकते हैं. विधानसभा चुनावों की शानदार जीत के बाद अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या BJP निगम में भी अपना दबदबा फिर कायम कर पाएगी या AAP वापसी कर बीजेपी को झटका देगी. जिन 12 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से 9 बीजेपी और 3 AAP के पास थीं. इनमें शालीमार बाग बी जैसी सीटें खास अहमियत रखती हैं, जहां से मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले पार्षद रह चुकी हैं.
51 उम्मीदवार, आधी आबादी पर BJP का दांव
इस उपचुनाव में 51 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 26 महिलाएं शामिल हैं. BJP ने आधी आबादी को साधने के लिए 8 महिला उम्मीदवार उतारी हैं, जबकि AAP ने 6 और कांग्रेस ने 5 महिलाओं को टिकट दिया है. यह चुनाव MCD की मौजूदा तस्वीर को भी बदल सकता है. 250 सीटों वाले सदन में अभी BJP के 116, AAP के 99, इंड्रप्रस्थ विकास पार्टी के 15 और कांग्रेस के 8 पार्षद हैं. चूंकि यहां दलबदल कानून लागू नहीं होता, पिछले दो साल में कई पार्षद पाला बदल चुके हैं. ऐसे में ये 12 सीटें सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि धारणा और पकड़ को मजबूत करने का मौका हैं.
BJP और AAP की तैयारी, मुकाबला कड़ा
BJP ने उपचुनाव को रेखा सरकार की साख से जोड़कर पूरा जोर लगा दिया है. मेयर राजा इकबाल सिंह ने दावा किया है कि जनता AAP से नाराज है और बीजेपी 12 में से 12 सीटें जीतकर दिखाएगी. पार्टी ने हर वार्ड में ताबड़तोड़ प्रचार किया, नुक्कड़ सभाएं, डोर-टू-डोर कैंपेन और स्थानीय नेताओं की सक्रियता पूरी रफ्तार पर रही. दूसरी तरफ AAP भी पीछे नहीं रही. हालांकि अरविंद केजरीवाल प्रचार में नहीं आए, लेकिन आतिशी, सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह ने पूरी ताकत लगा दी. AAP का फोकस निगम की सफाई, बिजली-पानी सेवाओं और मोहल्ला क्लीनिक जैसे मुद्दों पर रहा.
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3 दिसंबर को किसके खाते में जाएगी बढ़त?
अब सवाल ये है कि क्या रेखा सरकार की पहली अग्निपरीक्षा में BJP क्लीन स्वीप कर पाएगी या AAP मुकाबले को रोमांचक बना देगी. अगर बीजेपी सभी 12 सीटें जीत लेती है, तो यह न सिर्फ रेखा सरकार की लोकप्रियता का प्रमाण होगा बल्कि राजधानी की राजनीति में उसकी पकड़ और मजबूत हो जाएगी. लेकिन अगर AAP इन सीटों पर वापसी कर लेती है, तो ये संदेश जाएगा कि निगम में अभी भी उसका मजबूत आधार है और मुकाबला आगे और दिलचस्प होने वाला है. 3 दिसंबर के नतीजे तय कर देंगे कि दिल्ली की सियासत किस करवट बैठेगी.