दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट केस में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने फरीदाबाद के धौज गांव से शोएब नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि शोएब ने धमाके के मास्टरमाइंड और आतंकी डॉक्टर उमर उन नबी को कार बम ब्लास्ट से पहले शरण और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था। 10 नवंबर को हुए इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। एनआईए ने पहले से ही इस केस में छह आतंकियों को पकड़ा है, जिससे यह गिरफ्तारी सातवीं बन गई है।
धमाके से पहले कैसे दी गई मदद ?
एनआईए की जांच के मुताबिक शोएब अल-फलाह यूनिवर्सिटी में वार्ड बॉय था और मेवात से मरीज लेकर अक्सर उमर और मुजम्मिल के पास जाता था। इसी वजह से दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और शोएब ने आतंकी उमर को कई बार नूंह और आसपास के इलाकों में छिपाया। एजेंसी का कहना है कि ब्लास्ट से पहले आरोपी को सुरक्षित ठिकाना देने के अलावा उसे खाना, मोबाइल और आवाजाही जैसी सुविधाएं भी शोएब ने ही मुहैया कराईं। यह पूरा नेटवर्क इतनी चतुराई से चलाया गया कि शुरुआत में स्थानीय पुलिस को इसका अंदेशा तक नहीं हुआ।
एनआईए की लगातार छापेमारी जारी
इससे पहले एनआईए उमर और मुजम्मिल को साथ लेकर फरीदाबाद पहुंची थी, जहां दोनों ने किराए पर कमरे लिए थे। जांच टीम ने उन कमरों की तलाशी ली, आसपास के लोगों से पूछताछ की और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का भी दौरा किया। इसी दौरान शोएब की भूमिका उजागर हुई और उसे तुरंत गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि कई राज्यों में छापेमारी जारी है और ब्लास्ट में शामिल हर व्यक्ति की पहचान की जा रही है।
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अब तक 7 की गिरफ्तारी
लाल किला ब्लास्ट केस में अब तक सात आरोपी पकड़े जा चुके हैं। इनमें पुलवामा, अनंतनाग, लखनऊ और शोपियां के युवक शामिल हैं, जो उमर के नेटवर्क का हिस्सा थे। एनआईए का कहना है कि दिल्ली में हुए इस भयावह हमले का मकसद बड़ा नुकसान पहुंचाना था और अब एजेंसी इस पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ रही है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले दिनों में और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मामला बेहद संवेदनशील है और जांच टीमें किसी भी सुराग को अनदेखा नहीं कर रहीं।