Delhi riots case: दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात लोगों की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट जल्द बड़ा फैसला सुनाने वाला है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 5 जनवरी को सुनाया जाएगा। इन आरोपियों में उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा उर रहमान सहित अन्य शामिल हैं, जो गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत लंबे समय से जेल में बंद हैं।
ट्रायल में देरी और लंबी हिरासत पर जमानत की मांग
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल में अत्यधिक देरी हो रही है और वे कई साल जेल में बिता चुके हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि कई आरोपी अपनी संभावित सजा की अवधि के करीब पहुंच चुके हैं, जबकि अभी तक मुकदमे के पूरा होने के आसार नहीं हैं। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कहीं भी सरकार को उखाड़ फेंकने जैसी साजिश का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और केवल भाषणों के आधार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो कानूनन पर्याप्त नहीं हैं।
लंबे समय तक जेल में रखने पर उठे सवाल
गुलफिशा फातिमा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत में कहा कि वह लगभग छह साल से जेल में हैं और अब तक मुख्य चार्जशीट के साथ कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। इसके बावजूद ट्रायल शुरू होने की स्थिति साफ नहीं है। उन्होंने इसे “प्री-ट्रायल सजा” बताते हुए कहा कि बिना दोष सिद्ध हुए किसी को इतने लंबे समय तक जेल में रखना न्याय व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अब सुप्रीम कोर्ट का 5 जनवरी का फैसला यह तय करेगा कि इन दलीलों के आधार पर आरोपियों को जमानत मिलेगी या उन्हें अभी और इंतजार करना होगा।