ED Takes Strict Action: आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शिकंजा कस दिया है। ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत ग्रुप की करीब 99 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह संपत्तियां नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम में स्थित हैं। आम्रपाली घोटाले से जुड़े मामलों में इसे अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में गिना जा रहा है। इस कदम को हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए राहत की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जो वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं।
फ्लैट खरीदारों के पैसों के दुरुपयोग का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया है कि आम्रपाली ग्रुप के निदेशकों ने सहयोगियों के साथ मिलकर खरीदारों से ली गई रकम का गलत इस्तेमाल किया। आरोप है कि फ्लैट देने के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले गए, लेकिन समय पर निर्माण पूरा नहीं किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि खरीदारों के पैसों को प्रोजेक्ट्स में लगाने के बजाय अन्य उद्देश्यों में खर्च किया गया, जिससे कई हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरे रह गए और लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
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फर्जी लेन-देन और शेल कंपनियों का इस्तेमाल
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि निर्माण सामग्री की खरीद के नाम पर फर्जी लेन-देन किए गए। कथित तौर पर शेल कंपनियों और नकली सप्लायरों के जरिए धन को इधर-उधर घुमाया गया और नकद निकासी कर अवैध आय को छिपाने की कोशिश की गई। ईडी ने मौर्या उद्योग लिमिटेड से जुड़ी जमीन, फैक्ट्री और कार्यालय सहित कई संपत्तियों को अटैच किया है। इस मामले में अब तक 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि ये संपत्तियां अवैध रूप से अर्जित धन को छिपाने के लिए इस्तेमाल की गई थीं और आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है।