Delhi SIR Protest 2026 : दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कई संगठनों के लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग करते हुए नारे लगाए। मार्च कालीबाड़ी मार्ग और भाई वीर सिंह मार्ग के चौराहे के पास गोल डाकघर से शुरू हुआ था। पुलिस ने चुनाव आयोग की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी आसपास के इलाके में जुटे रहे और नारेबाजी करते रहे।
पुलिस ने अनुमति का दिया हवाला
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को बंगला साहिब गुरुद्वारे और गुरुद्वारा रकाब गंज के आसपास जमा होने के बाद धरना खत्म करने को कहा गया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति दोपहर 2 बजे तक ही थी। इसके बाद भी प्रदर्शन जारी रहने पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर वहां से हटाया। प्रदर्शनकारियों की ओर से मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया। उनका कहना था कि SIR प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियों को सुना जाना चाहिए। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाने और प्रक्रिया की वैधता को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की बड़ी रैली होने वाली है। उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार (RTI) से सामने आई जानकारी से चुनाव आयोग के कामकाज में सरकार के कथित दखल को लेकर विपक्ष की आशंकाएं सही साबित हुई हैं। वेणुगोपाल के मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्रों पर कार्रवाई नहीं किए जाने की टिप्पणी के साथ जवाब दिया गया था। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जानकारी से जुड़ा मामला बताया। ये आरोप कांग्रेस नेता ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों का पूरा संदर्भ अहम है।
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वृंदा करात और योगेंद्र यादव का बयान
प्रदर्शन में शामिल वामपंथी नेता वृंदा करात ने आरोप लगाया कि देश में वोटों की चोरी हो रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाने के बजाय सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। करात ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि विरोध की आवाज को रोका नहीं जा सकता। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन में विदेशी धन के इस्तेमाल का कोई प्रमाण है, तो सरकार को जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। दोनों नेताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए।
प्रदर्शन और तेज करने की चेतावनी
SIR के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल CPI नेता पी. संतोष ने कहा कि आंदोलन आगे और तेज किया जाएगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने “SIR रोको” और “वोट की चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे” जैसे नारे लगाए। कुछ नेताओं ने मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई, जबकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था और प्रदर्शन की अनुमति का हवाला देते हुए कार्रवाई की। इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारी उठाए गए सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।