इस साल दिल्ली ट्रेड फेयर में सबसे ज्यादा भीड़ अगर किसी जगह पर दिखाई दे रही है तो वो है उत्तराखंड, हिमाचल और कश्मीर के ऊनी कपड़ों वाले पवेलियन। कश्मीर की प्रीमियम पश्मीना शॉल, हिमाचल के याक ऊन के कॉप्तान, कुल्लू-मनाली के मफलर और हरिद्वार की कॉटन-वूल जैकेट लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस बार बिक्री उम्मीद से कई गुना ज़्यादा हुई है। इन कपड़ों की खासियत है इनकी नर्मी, गर्माहट और कारीगरी—जिसे देखकर लोग दाम की परवाह नहीं कर रहे। ज्यादातर स्टॉलों पर सुबह से शाम तक खरीददारों की लाइन लगी रहती है।
बाल मिठाई, सिंघौड़ी और पहाड़ी जूस ने बढ़ाया स्वाद
अगर आप ट्रेड फेयर घूमने गए और बाल मिठाई या सिंघौड़ी नहीं चखी, तो मान लीजिए आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। अल्मोड़ा और कुमाऊं की ये मशहूर मिठाइयां यहां आते ही सबसे पहले बिकती हैं। दुकानदार बताते हैं कि सिंघौड़ी की डिमांड इतनी ज्यादा है कि बार-बार स्टॉक खत्म हो जाता है। इसके अलावा गढ़वाल के माल्टा, लीची और बुरांश के जूस भी लोगों को खूब भा रहे हैं। जूस की ताजगी और पहाड़ी स्वाद लोगों को तुरंत अपनी ओर खींच लेता है। खाने-पीने के शौकीनों के लिए ये स्टॉल ट्रेड फेयर के सबसे हॉटस्पॉट बने हुए हैं।
विदेशी स्टॉल-डेकोर, ड्राई फ्रूट्स और अनोखे प्रोडक्ट
ट्रेड फेयर की खासियत सिर्फ भारतीय उत्पाद नहीं, बल्कि विदेशी स्टॉल भी हैं। नेपाल, तुर्की, थाईलैंड, ईरान, इजिप्ट और कोरिया के 100 से अधिक स्टॉल्स इस बार लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यहां तुर्की के हैंडमेड डेकोर, ईरान के ड्राई फ्रूट्स, अफगानिस्तान का केसर और थाईलैंड की लाइफस्टाइल चीजें खूब बिक रही हैं। कई लोग इन्हें स्मारिका के तौर पर खरीद रहे हैं। विदेशी कलाकृतियों की क्वालिटी और डिजाइन देखकर लोग कहते हैं कि पूरा दिन भी कम पड़ जाए तो भी इन स्टॉल्स का मजा खत्म नहीं होता।
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सांस्कृतिक शो, सेल्फी पॉइंट और खरीदारी का मेला
खरीदारी और खाने से आगे भी ट्रेड फेयर में बहुत कुछ है। यहां हर दिन अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां माहौल को रंगीन बना देती हैं। राजस्थानी लोक नृत्य, पूर्वोत्तर जनजातीय परफॉर्मेंस और हिमाचली धुनों ने फेयर को एक मिनी-इंडिया बना दिया है। बच्चों के लिए डिफेंस पवेलियन, मिसाइल मॉडल, स्पेस ज़ोन और थीम वाली फोटो स्पॉट्स बड़े आकर्षण हैं। भीड़ का उत्साह देखकर साफ है कि प्रगति मैदान में लगा यह फेयर इस बार मिस नहीं करना चाहिए। अगर आप उत्तराखंड के ऊनी कपड़े, कश्मीर की पश्मीना, बाल मिठाई, पहाड़ी जूस और विदेशी स्टॉल्स नहीं देख पाए तो पछताना तय है।