Delhi Voter List SIR : दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले मौजूद 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 47.5 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। यह प्रक्रिया घर-घर सत्यापन अभियान के बाद पूरी की गई। आयोग का कहना है कि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो दूसरी जगह स्थायी रूप से जा चुके हैं, जबकि कुछ नाम मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं से जुड़े पाए गए।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर
ड्राफ्ट सूची के आंकड़ों के अनुसार ओखला, तुगलकाबाद, बदरपुर, बुराड़ी और रिठाला जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम कम हुए हैं। ओखला में लगभग 1.63 लाख नाम कम हुए, जबकि बदरपुर और विकासपुरी में करीब 1.46 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं। बुराड़ी क्षेत्र में भी डेढ़ लाख से अधिक नाम कम होने की बात सामने आई है। प्रतिशत के हिसाब से तुगलकाबाद में सबसे अधिक 47.85 फीसदी नाम घटे हैं, जबकि ओखला में 45.33 फीसदी और कस्तूरबा नगर में 44.03 फीसदी नाम कम हुए हैं।
कुछ इलाकों में कम हुई कटौती
दूसरी ओर कुछ विधानसभा क्षेत्रों में नाम हटने का अनुपात अपेक्षाकृत कम रहा। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक रोहिणी में केवल 16.5 फीसदी नाम कम हुए हैं। शकूर बस्ती में 18.74 फीसदी, राजौरी गार्डन में 20.86 फीसदी और मटिया महल में 24.5 फीसदी नाम हटाए गए हैं। दिल्ली कैंट में सबसे कम 22,855 नाम सूची से बाहर हुए हैं। इससे साफ है कि अलग-अलग क्षेत्रों में संशोधन का प्रभाव अलग स्तर पर दिखाई दिया है।
ये भी पढ़ें : Mumbai में एक ही दिन में महंगाई के तीन झटके, जेब पर कितना बढ़ा बोझ?
पुराने दिल्ली क्षेत्र भी प्रभावित
पुरानी दिल्ली और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भी मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। चांदनी चौक में करीब 39 फीसदी नाम कम हुए हैं। बल्लीमारान में 32.6 फीसदी, मुस्तफाबाद में 28 फीसदी, बाबरपुर में 27 फीसदी और सीलमपुर में 23.3 फीसदी नाम सूची से हटाए गए हैं। निर्वाचन आयोग का कहना है कि इन बदलावों का आधार सत्यापन अभियान के दौरान जुटाई गई जानकारी है।
नाम हटने की बताई वजह
आयोग के अनुसार हटाए गए नामों में लगभग 43 फीसदी ऐसे लोगों के हैं जो स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर चले गए हैं। इसके अलावा करीब 2.8 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। वहीं लगभग डेढ़ लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए। एसआईआर अभियान के दौरान 1 करोड़ 45 लाख से अधिक मतदाताओं का सत्यापन किया गया। इनमें से 67 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से साझा की।
नाम नहीं है तो क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं दिखाई देता है, तो उसके पास अभी मौका है। 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दर्ज कर नाम जुड़वाया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म-6 भरना होगा और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। मतदाता अपना नाम दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर जाकर भी जांच सकते हैं। सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जाएगी।