
दिल्ली की धड़कन कही जाने वाली यमुना नदी इन दिनों विकराल रूप धारण कर चुकी है। नदी का जलस्तर 206.93 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से काफी ऊपर है। नतीजा यह है कि दिल्ली-एनसीआर के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। यमुना किनारे बसे मयूर विहार, जैतपुर पुश्ता, श्याम घाट और यमुना बाजार का हाल बेहद भयावह है। हर तरफ मटमैला पानी फैल गया है, खाटें तैर रही हैं और लोग घुटनों तक पानी में से होकर गुजरने को मजबूर हैं।
फसलें बर्बाद, किसान बेबस
भारी बारिश से हो रहे नुकसान का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। बारिश के कारण मदनपुर खादर जैसे इलाकों में खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। किसान रामशंकर और विकास ने बताया कि महीनों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई। खेती पर निर्भर परिवारों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। झोपड़ियां भी पानी में डूब गई हैं और लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं।
रिहायशी और धार्मिक स्थल डूबे
आईएसबीटी के पास मॉनस्ट्री मार्केट और आसपास के रिहायशी इलाके जलमग्न हैं। लद्दाख बुद्ध विहार मंदिर, निगम बोध घाट और यमुना बाजार में 10 फुट तक पानी भर गया है। यहां दुकानें बंद हो गई हैं और लोग अपना सामान सिर पर रखकर ले जाते दिखे।
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नोएडा-फरीदाबाद में तबाही, फार्महाउस जलमग्न
नोएडा के मंगरौली, याकूतपुर और झट्ट गांव के साथ-साथ सेक्टर-128 और सेक्टर-135 के आलीशान फार्महाउस भी पानी में डूब गए हैं। करोड़ों की लागत से बने इन फार्महाउसों में शादियां और पार्टियां होती थीं, लेकिन अब यह जलकुंड बन गए हैं। नोएडा प्रशासन ने इन्हें तुरंत खाली कराने का आदेश दिया है। क्रिकेट ग्राउंड तक पानी भर गया है।
रातों-रात बेघर लोग
मयूर विहार फ्लाईओवर और उसके आसपास झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग रात 3 बजे अचानक बढ़े पानी से बेघर हो गए। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे सोने को मजबूर हैं। राहत शिविरों में कुछ लोगों को शरण दी गई है, लेकिन भीड़ इतनी है कि सभी को जगह मिल पाना मुश्किल है।
रेल और यातायात ठप
पुरानी दिल्ली रेलवे पुल से ट्रेन संचालन रोक दिया गया है। मंगलवार शाम से यहां वाहनों की आवाजाही भी बंद है। कई बुकिंग कैंसिल होने से आयोजकों और कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है।
प्रशासन की अपील
अधिकारियों का कहना है कि हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी ने स्थिति और बिगाड़ दी है। नावों से घोषणाएं की जा रही हैं और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। लेकिन सच्चाई यही है कि यमुना का ये उफान दिल्ली-एनसीआर में हजारों लोगों की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर चुका है।