
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पाडर उपमंडल में स्थित चिशोती गांव में गुरुवार को बादल फटने और भूस्खलन से भारी तबाही मच गई. इस घटना में अब तक 60 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 120 से ज्यादा लोग घायल हैं. कई परिवारों का अभी तक कोई पता नहीं चला है. मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी है. सामने आया एक वीडियो इस आपदा की भयावह तस्वीरें दिखा रहा है, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है.
मचैल माता यात्रा पर गहरा असर
चिशोती गांव मचैल माता यात्रा मार्ग पर एक अहम पड़ाव है. 25 जुलाई से शुरू हुई यह यात्रा 5 सितंबर को पूरी होनी थी. इस दौरान हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचे थे. हादसे में मरने वालों में ज्यादातर मचैल माता के तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद यात्रा को रोक दिया गया है और यात्रियों से कहा गया है कि वो जहां हैं वहीं पर रुकें. गुरुवार दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच अचानक तेज बारिश हुई और देखते ही देखते बादल फट गया. पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर और पेड़ बहकर आए, जिसने घरों, दुकानों और यात्रियों के लिए लगाए गए लंगर (सामुदायिक रसोई) को पूरी तरह तबाह कर दिया. लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और पूरा इलाका मलबे में बदल गया. एक सुरक्षा चौकी भी पानी के तेज बहाव में बह गई.
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राहत और बचाव कार्य
घटना के बाद तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया. सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों को निकालने का प्रयास कर रही हैं. लेकिन खराब मौसम और दुर्गम इलाके के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किलें आ रही हैं. कई नालों में पानी का बहाव बहुत तेज हो गया है, जिससे खतरा अभी भी बना हुआ है.
प्रधानमंत्री ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आपदा पर गहरा दुख जताया है. प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों को हरसंभव मदद और घायलों के इलाज का आश्वासन दिया.
बता दें कि चिशोती गांव का वह हिस्सा, जो नाले के किनारे बसा था, पूरी तरह बह गया है. माना जा रहा है कि कई लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं. प्रशासन ने बताया कि लगातार खोजबीन की जा रही है और हर संभव कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके.