नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने एयर इंडिया के एक पायलट को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। यह मामला जून 2025 का है, जब बोइंग 787 विमान को गंभीर तकनीकी समस्याओं के बावजूद उड़ाया गया। टोक्यो से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI 358 को रास्ते में कोलकाता डायवर्ट करना पड़ा था। विमान के केबिन में तापमान असामान्य रूप से बढ़ गया था, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। DGCA का कहना है कि इस उड़ान के दौरान सुरक्षा से जुड़े कई अहम नियमों की अनदेखी की गई।
डिस्पैच और नियमों पर उठे सवाल
DGCA ने अपने नोटिस में साफ कहा है कि AI 358 और AI 357 दोनों उड़ानों के संचालन में गंभीर खामियां पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि विमान को मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट यानी MEL के नियमों के अनुरूप डिस्पैच नहीं किया गया। कुछ ऐसे उपकरणों के साथ विमान उड़ाया गया, जिनकी अनुमति नियमों के तहत नहीं थी। इसके बावजूद फ्लाइट को उड़ान की मंजूरी दी गई। DGCA ने इसे सुरक्षा मानकों के लिहाज से बेहद चिंताजनक बताया है।
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बार बार आई खराबी ने बढ़ाई चिंता
नोटिस में यह भी जिक्र है कि दिल्ली से टोक्यो जाने वाली एक उड़ान के दौरान विमान में धुएं जैसी गंध महसूस की गई थी। यह कोई पहली घटना नहीं थी। इससे पहले भी इसी तरह की दिक्कतें पांच बार सामने आ चुकी थीं। इसका मतलब साफ था कि विमान के सिस्टम में पहले से ही लगातार खराबी बनी हुई थी। DGCA के मुताबिक, ऐसी स्थिति में विमान को उड़ाने से पहले गहन सुरक्षा मूल्यांकन जरूरी था, जो सही तरीके से नहीं किया गया।
14 दिन में मांगा गया जवाब
DGCA ने नोटिस में कहा है कि 28 जून 2025 को ऑपरेटिंग क्रू ने कई खराब सिस्टम के संयुक्त असर का सही आकलन नहीं किया। यही वजह है कि पायलट को 14 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। फिलहाल एयर इंडिया की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह मामला पुराना है और उस समय आंतरिक स्तर पर इसे सुलझा लिया गया था।