साल 2025 में अगर किसी एक वैश्विक मुद्दे ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, तो वह डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति रही। 2 अप्रैल 2025 से अमेरिका ने भारत, चीन, ब्राजील समेत कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ट्रंप ने इसे लिबरेशन डे बताते हुए कहा कि जिन देशों ने अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाया, अमेरिका भी उतना ही टैक्स लगाएगा। कुछ देशों पर टैरिफ घटाए गए, लेकिन भारत पर दर बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई। चीन के साथ टैरिफ खींचतान ने ट्रेड वॉर जैसी स्थिति पैदा कर दी, हालांकि बाद में ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत से हालात कुछ शांत हुए।
आलोचना के बावजूद ट्रंप अड़े अपने फैसले पर
ट्रंप की इस टैरिफ नीति की दुनियाभर में आलोचना हुई। अर्थशास्त्रियों और कई देशों ने इसे वैश्विक व्यापार के लिए नुकसानदायक बताया। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इन सभी आलोचनाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि टैरिफ का विरोध करने वाले मूर्ख हैं। ट्रंप का दावा रहा कि टैरिफ से अमेरिका मजबूत हो रहा है और किसानों से लेकर घरेलू उद्योग तक फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि टैरिफ से अमेरिका को खरबों डॉलर की कमाई हो रही है और यह पैसा देश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे रहा है।
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टैरिफ से अमेरिका को कितनी हुई कमाई
हालांकि ट्रंप सरकार ने टैरिफ से हुई कुल कमाई का कोई अंतिम आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े तस्वीर साफ करते हैं। यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के अनुसार 2025 में 15 दिसंबर तक अमेरिका को टैरिफ से 200 अरब डॉलर से ज्यादा का राजस्व मिला। टैक्स पॉलिसी थिंक टैंक द टैक्स फाउंडेशन के मुताबिक अक्टूबर 2025 तक ही यह आंकड़ा 205 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका था। अनुमान है कि 2026 में ट्रंप टैरिफ से अमेरिका को करीब 207.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
2000 डॉलर वाला वादा क्यों बना सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ रेवेन्यू को लेकर एक बड़ा राजनीतिक वादा भी किया था। उन्होंने कहा था कि इस कमाई से अमेरिका के बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज को कम किया जा सकता है, जो करीब 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि टैरिफ डिविडेंड के तौर पर लगभग हर अमेरिकी को 2000 डॉलर दिए जाएंगे, हाई इनकम वालों को छोड़कर। लेकिन इस वादे पर अब सवाल उठ रहे हैं। कई रिपब्लिकन सांसदों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि को बांटना आसान नहीं होगा। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने संकेत दिए हैं कि 2026 में इसे लेकर कांग्रेस के सामने प्रस्ताव लाया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला संसद की मंजूरी पर ही निर्भर करेगा।