धर्मेंद्र को दुनिया जिस नाम से जानती है, वो नाम उन्होंने फिल्मों में आने के बाद अपनाया था। कम लोग जानते हैं कि उनका असली नाम धरम सिंह देओल था। लेकिन मुंबई आने से पहले उन्होंने अपना नाम बदलकर जीतेंद्र कुमार रख लिया था, क्योंकि उन्हें लगा कि ये नाम फिल्मों में पहचान दिलाएगा। जब ऑडिशन के दौरान पता चला कि इसी नाम का एक और अभिनेता इंडस्ट्री में मौजूद है, तब उन्होंने दोबारा नाम बदलकर धर्मेंद्र रखा। यह नाम न सिर्फ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना, बल्कि इस नाम ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिला दिया। धर्मेंद्र ने अपने दमदार अभिनय से इस नाम को अमर कर दिया।
कैसे मिली बॉलीवुड में पहली एंट्री
धर्मेंद्र का बॉलीवुड सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 1960 में फिल्मफेयर मैगज़ीन ने पहली बार एक टैलेंट हंट कॉन्टेस्ट आयोजित किया, और धर्मेंद्र इस प्रतियोगिता के विजेता बने। उन्हें पुरस्कार के रूप में 5000 रुपये और एक फिल्म का कॉन्ट्रैक्ट मिला। इसी से उनकी पहली फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ रिलीज़ हुई। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत रही, लेकिन धर्मेंद्र की गहरी आंखें और सादगी भरा लुक दर्शकों और फिल्ममेकर्स पर छाप छोड़ गया। यही फिल्म आगे आने वाले उनके मेगा स्टारडम की शुरुआत बनी।
असली ‘ही-मैन’ कैसे बने धर्मेंद्र
आज भले ही एक्टर्स जिम में घंटों वर्कआउट कर ही-मैन इमेज बनाते हैं, लेकिन असली ही-मैन तो धर्मेंद्र थे। उस दौर में जब ज्यादातर हीरो रोमांटिक किरदार निभाते थे, धर्मेंद्र अपनी मस्कुलर बॉडी, स्टंट और निडर अंदाज से भीड़ खींचते थे। ‘फूल और पत्थर’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘धरम वीर’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्शन जगत का बादशाह बना दिया। बिना शर्ट के सीन, घोड़ों पर दौड़, दुश्मनों से भिड़ने वाले दृश्य—उनकी हर फिल्म में ही-मैन की झलक दिखती थी। दर्शक सीटियां बजाते थे और पब्लिक थिएटर में झूम उठती थी। धर्मेंद्र का एक्शन उस दौर के लिए क्रांतिकारी था।
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प्यार के लिए धर्म बदलने तक की कहानी
धर्मेंद्र की निजी जिंदगी भी उतनी ही फिल्मी रही। 1954 में उनकी पहली शादी प्रकाश कौर से हुई और चार बच्चे हुए—सनी देओल, बॉबी देओल, विजयता और अजीता। इसी बीच ‘शोले’ के सेट पर उनकी मुलाकात हुई हेमा मालिनी से, और दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए। लेकिन हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार, दूसरी शादी करना संभव नहीं था। धर्मेंद्र ने इसे हल करने के लिए बड़ा कदम उठाया—उन्होंने इस्लाम कबूल कर अपना नाम ‘दिलावर खान’ रख लिया और हेमा मालिनी से निकाह किया। हेमा का नाम बताया जाता है ‘आयशा बी रज़ा’। उन्होंने दोनों परिवारों को साथ निभाया और अपने सभी बच्चों को समान प्रेम दिया।