Waqf Properties Incomplete: देशभर की वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किए गए केंद्र सरकार के UMEED पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हो सकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 62 प्रतिशत संपत्तियों को ही अंतिम मंजूरी मिल पाई है। वहीं करीब 1.06 लाख संपत्तियों का रिकॉर्ड अब तक पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है। ऐसे में इन संपत्तियों के पंजीकरण और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं, जबकि इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस भी तेज हो गई है।
समय सीमा बढ़ने के बाद भी लक्ष्य अधूरा
केंद्र सरकार ने 6 जून को UMEED पोर्टल लॉन्च करते समय देश के 38 वक्फ बोर्डों को छह महीने के भीतर सभी वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद इसे आगे भी बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में संपत्तियों का रिकॉर्ड अब तक पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाया है। इससे डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी है।
मुस्लिम संगठनों ने उठाए तकनीकी सवाल
वक्फ से जुड़े कई संगठनों और मुतवल्लियों का कहना है कि पोर्टल पर तकनीकी समस्याएं, आवश्यक दस्तावेजों की कमी और प्रक्रिया की जटिलता के कारण पंजीकरण प्रभावित हुआ है। उनका सुझाव है कि संपत्तियों के पंजीकरण की जिम्मेदारी व्यक्तिगत मुतवल्लियों के बजाय संबंधित वक्फ बोर्डों को दी जाए, ताकि प्रक्रिया अधिक प्रभावी तरीके से पूरी हो सके। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों को समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना चाहिए।
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सरकार की चेतावनी और बढ़ी राजनीतिक बहस
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जिन वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं होगा, उनका भविष्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि मंत्रालय की ओर से अभी तक नई समय-सीमा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि जिन संपत्तियों के वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनकी कानूनी स्थिति की जांच होनी चाहिए। वहीं विपक्ष और कई मुस्लिम संगठन सरकार के रुख पर सवाल उठा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है मामला
वक्फ संशोधन कानून पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती का सामना कर रहा है, जहां इस विषय से जुड़ी 65 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं। इसके अलावा कई राज्यों में नए वक्फ बोर्डों का गठन अभी पूरा नहीं हुआ है, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। ऐसे में करीब 1.06 लाख अपंजीकृत वक्फ संपत्तियों का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार नई समय-सीमा तय करती है, कोई नया दिशा-निर्देश जारी करती है या फिर इस मुद्दे पर आगे का रास्ता न्यायालय और सरकारी निर्णयों के आधार पर तय होता है।