Putin visit India: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजदूतों द्वारा एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित संयुक्त लेख ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस लेख में तीनों राजदूतों ने यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन की तीखी आलोचना की और उन पर शांति प्रक्रिया को रोकने का आरोप लगाया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे असामान्य, अनुचित और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के विपरीत बताया है। अधिकारियों के अनुसार, जिस समय दोनों देशों के बीच अहम वार्ता होने वाली है, उस समय ऐसे लेख का प्रकाशित होना अनुचित हस्तक्षेप जैसा है। यह घटना ऐसे वक्त सामने आई है जब पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वीं भारत–रूस शिखर बैठक में शामिल होने आ रहे हैं।
भारत की आपत्ति क्यों?
तीनों यूरोपीय देशों के राजदूतों ने अपने लेख में रूस के हमलों, युद्ध लंबा खिंचने और पुतिन की नीतियों पर सवाल उठाए। इसके जवाब में रूस के राजदूत ने भी उसी अखबार में प्रतिवाद प्रकाशित किया। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के रूस से दशकों पुराने संबंधों के बीच इस तरह की बयानबाजी न सिर्फ कूटनीतिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि भारत की विदेश नीति में हस्तक्षेप जैसा भी प्रतीत होता है। भारतीय अधिकारियों का स्पष्ट रुख है कि युद्ध का समाधान वार्ता से ही संभव है और भारत किसी भी ऐसे प्रयास का समर्थन करेगा जो स्थायी शांति की दिशा में ले जाए। इसी वजह से विदेश मंत्रालय ने इस लेख पर आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
पुतिन–मोदी बैठक में क्या होगा एजेंडा
अधिकारियों के मुताबिक, पुतिन की यात्रा के दौरान दोनों देश श्रमिक गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं जिससे भारतीयों के रूस में काम करने की प्रक्रिया सरल होगी। इसके साथ ही व्यापार, कृषि, शिक्षा, संस्कृति और उर्वरक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। भारत–रूस के बीच व्यापार संतुलन बिगड़ने पर भारत चिंतित है क्योंकि रूस से भारत हर वर्ष करीब 65 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि भारत का निर्यात मात्र 5 अरब डॉलर के आसपास है। यही कारण है कि दवाइयों, कृषि उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्यात को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी आगे बढ़ाने की कोशिश होगी।