कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए कई नए और अनुभवी नेताओं को जगह दी है। नई कैबिनेट में कुछ नए चेहरों की एंट्री हुई है, जबकि कई पुराने नेताओं पर भी भरोसा दोहराया गया है। हालांकि लंबे समय से युवाओं को ज्यादा अवसर देने की मांग उठ रही थी, लेकिन इस बार भी सीमित संख्या में ही नए नेताओं को मंत्री बनाया गया है।
इन नेताओं को मिला मंत्री पद
नई कैबिनेट में रिजवान अरशद और पूर्व मुख्यमंत्री धरम सिंह के बेटे अजय सिंह पहली बार मंत्री बने हैं। इसके अलावा नरेंद्र स्वामी, बसवंतप्पा, रघुमूर्ति, पुट्टारंगाशेट्टी, गायत्री शांते गौड़ा, विजयानंद काशप्पनवर और शिवलिंगे गौड़ा को भी पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। वहीं जमीर अहमद खान और बी. नागेंद्र जैसे नेताओं की दोबारा वापसी हुई है।
जातीय संतुलन साधने की कोशिश
नई कैबिनेट में सामाजिक और जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। लिंगायत समुदाय से 7, वोक्कालिगा समुदाय से 5, अनुसूचित जाति से 7, अनुसूचित जनजाति से 3 और अन्य पिछड़ा वर्ग से 5 नेताओं को मंत्री बनाया गया है। मुस्लिम समुदाय को तीन मंत्री पद और विधान परिषद के सभापति समेत कुल चार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। हालांकि इस बार किसी भी ब्राह्मण नेता को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
महिला और युवा प्रतिनिधित्व पर सवाल
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पूरी कैबिनेट में केवल एक महिला को मंत्री बनाया गया है। वहीं युवा नेताओं को अपेक्षा के मुताबिक मौका नहीं मिलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने अनुभव और सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता दी है।
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चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश
नई कैबिनेट को आगामी राजनीतिक चुनौतियों और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। डीके शिवकुमार ने एक ओर नए चेहरों को अवसर दिया है तो दूसरी ओर अनुभवी नेताओं पर भरोसा कायम रखा है। अब इस मंत्रिमंडल का प्रदर्शन और विभिन्न वर्गों के बीच इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में अहम माना जाएगा।