भारत की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने युवाओं के बीच बढ़ती अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गाली देना कभी भी 'कूल' नहीं हो सकता। मनु ने लोगों से अपील की कि वे अपनी भाषा और शब्दों का चयन सोच-समझकर करें, क्योंकि इंसान की पहचान उसके व्यवहार और बोलचाल से होती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब Gen-Z की भाषा को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है।
सोशल मीडिया पर कही यह बात
मनु भाकर ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि हम जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वही हमारी सोच और व्यक्तित्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि शब्दों को हमेशा सोच-समझकर चुनना चाहिए, क्योंकि समय के साथ इंसान वही बनता है जो वह सोचता, बोलता और करता है। उनका मानना है कि अच्छी भाषा व्यक्ति के संस्कार और व्यक्तित्व दोनों को मजबूत बनाती है।
'गाली देना कूल नहीं'
मनु भाकर ने कहा कि आज के समय में कुछ लोग गाली-गलौज को आत्मविश्वास या आधुनिकता की निशानी मानने लगे हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि अभद्र भाषा का इस्तेमाल कभी भी कूल नहीं हो सकता। उनके मुताबिक सम्मानजनक भाषा ही समाज में सकारात्मक माहौल बनाती है और दूसरों के प्रति सम्मान दिखाती है।
युवाओं को दी खास सीख
मनु भाकर ने युवाओं के लिए 'कूल' होने की अपनी परिभाषा भी बताई। उन्होंने कहा कि मेहनती होना, खुद और दूसरों का सम्मान करना, ईमानदारी से सफलता हासिल करना और अपने माता-पिता तथा देश का नाम रोशन करना ही असली कूलनेस है। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया और रोजमर्रा की जिंदगी में भी जिम्मेदारी के साथ भाषा का इस्तेमाल करने की अपील की।
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बयान के बाद तेज हुई चर्चा
मनु भाकर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब सार्वजनिक जीवन और सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर लगातार बहस हो रही है। उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संदेश साफ था कि सभ्य भाषा ही स्वस्थ समाज की पहचान है। उनके इस बयान के बाद भाषा, संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।