DMRC Recharge Rules : दिल्ली मेट्रो में रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं और इनमें बड़ी संख्या मेट्रो कार्ड इस्तेमाल करने वालों की है। ऑनलाइन रिचार्ज की सुविधा ने यात्रियों का काम आसान बना दिया है, लेकिन रिचार्ज करते समय की गई एक छोटी सी गलती बड़ा नुकसान करा सकती है। अगर आपने गलती से किसी दूसरे कार्ड में रिचार्ज कर दिया, तो पैसा वापस मिलना आसान नहीं होगा।
180 दिन के अंदर करना होता है टॉप-अप
ऑनलाइन रिचार्ज के बाद मेट्रो स्टेशन पर जाकर कार्ड को टॉप-अप करना जरूरी होता है। अगर जिस कार्ड में रिचार्ज किया गया है, उसे 180 दिनों के भीतर टॉप-अप नहीं किया जाता, तो रिचार्ज की राशि एक्सपायर हो सकती है। ऐसी स्थिति में रकम वापस नहीं मिलती।
दूसरे कार्ड में रिचार्ज हुआ तो क्या होगा?
अगर गलती से किसी दूसरे सक्रिय मेट्रो कार्ड में रिचार्ज हो गया और कार्डधारक ने 180 दिनों के भीतर टॉप-अप कर लिया, तो राशि सीधे उसके कार्ड में जुड़ जाएगी। इसके बाद उस पैसे पर दावा करना या रिफंड पाना संभव नहीं होगा।
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शिकायत करने पर भी नहीं मिलेगा रिफंड
DMRC के नियमों के मुताबिक गलत कार्ड नंबर पर किया गया सफल रिचार्ज वैध ट्रांजैक्शन माना जाता है। ऐसे में कस्टमर केयर, हेल्पलाइन या ईमेल के जरिए शिकायत करने पर भी रिफंड नहीं दिया जाता। ऑनलाइन रिचार्ज के दौरान सही जानकारी भरने की जिम्मेदारी पूरी तरह यूजर की होती है।
क्यों नहीं लौटाया जाता पैसा?
अधिकांश मेट्रो कार्ड किसी व्यक्ति की पहचान से सीधे लिंक नहीं होते। ऐसे में यह तय करना मुश्किल होता है कि कार्ड किसका है और रकम किसने गलती से भेजी है। इसी वजह से गलत कार्ड में गई राशि को वापस ट्रांसफर करने की व्यवस्था नहीं है।
रिचार्ज करते समय रखें ये सावधानी
मेट्रो कार्ड रिचार्ज करने से पहले कार्ड नंबर ध्यान से दर्ज करें। भुगतान करने से पहले एक बार नंबर दोबारा जरूर जांच लें। कुछ सेकंड की सावधानी आपको बाद में होने वाले नुकसान से बचा सकती है।