Dog bites: देश में बढ़ती समस्या, हर साल बढ़ रहे कुत्ता काटने के मामलेदेश में आवारा कुत्तों की समस्या अब गंभीर सार्वजनिक मुद्दा बन चुकी है। सुप्रीम कोर्ट इस समय इस विषय पर सुनवाई कर रहा है और स्कूल, अस्पताल, अदालतों जैसी जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी पर सवाल उठा रहा है। अदालत का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। इसी क्रम में देशभर से जुड़े मामलों को एक साथ सुना जा रहा है, ताकि समस्या की व्यापकता को समझा जा सके।
लोकसभा में सरकार का खुलासा
सरकार ने लोकसभा में आवारा कुत्तों से जुड़े आंकड़े पेश किए थे। जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 के बीच ग्रामीण इलाकों में कुत्ते काटने की करीब 21.95 लाख घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 37 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। इसके अलावा, अन्य जानवरों के काटने के पांच लाख से अधिक मामले सामने आए, जिनमें 11 लोगों की जान गई। खास बात यह रही कि 15 साल से कम उम्र के करीब 5.19 लाख बच्चे कुत्तों के शिकार बने।
देशभर की स्थिति, हर साल बढ़ता खतरा
प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देशभर में कुत्तों के काटने के कुल 37.15 लाख मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। 2023 में यह संख्या करीब 30.52 लाख थी, जबकि 2022 में 21.89 लाख मामलों की पुष्टि हुई थी। लगातार बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
मौतों का आंकड़ा, डराने वाली हकीकत
इन मामलों में सिर्फ चोटें ही नहीं, बल्कि जानलेवा हमले भी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुत्तों के काटने से हर साल दर्जनों लोगों की मौत हो रही है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर मानी जा रही है, जहां इलाज और रोकथाम की सुविधाएं सीमित हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, समाधान की तलाश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। अदालत चाहती है कि प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए। नसबंदी, टीकाकरण और सुरक्षित स्थानों पर शिफ्टिंग जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।