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PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), पूसा में एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारत माता का सच्चा सपूत बताया। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन का योगदान न सिर्फ देश की खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में था, बल्कि उन्होंने विज्ञान को जनसेवा का साधन बनाकर लाखों किसानों की जिंदगी बदल दी।
#WATCH प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ' डॉ. स्वामीनाथन ने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया। लेकिन उनकी पहचान हरित क्रांति से भी आगे बढ़कर थी। वो खेती में रासायनिक के बढ़ते प्रयोग और मोनो कल्चर खेती के खतरों से किसानों को लगातार जागरूक करते रहे।" pic.twitter.com/qQOVZYJbjF
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 7, 2025
खेती के हर मोर्चे पर दी दिशा"
पीएम मोदी ने बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय डॉ. स्वामीनाथन ने ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ जैसी योजनाओं को लेकर मार्गदर्शन दिया, जिससे खेती को नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि गुजरात के सूखा प्रभावित क्षेत्रों और कच्छ के रेगिस्तानी विस्तार में कृषि को बचाने में स्वामीनाथन के सुझाव बेहद मददगार साबित हुए। पीएम मोदी ने यह भी याद किया कि वे करीब 20 साल पहले तमिलनाडु में उनके रिसर्च सेंटर का दौरा कर चुके हैं और 2017 में उनकी किताब The Quest for a World Without Hunger के विमोचन का अवसर भी मिला था।
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"किसानों के प्रेरणा स्रोत थे स्वामीनाथन"
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन न सिर्फ एक महान वैज्ञानिक थे बल्कि किसानों के सच्चे मार्गदर्शक भी थे। उनका मानना था कि विज्ञान केवल खोज तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अपने काम से यह बात सिद्ध भी की। स्वामीनाथन ने न केवल शोध किए बल्कि खेतों में जाकर किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का काम भी किया। आज भी भारत की कृषि नीतियों में उनका दृष्टिकोण साफ दिखाई देता है। पीएम मोदी ने उन्हें मां भारती का रत्न बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।