भारत में गाड़ी चलाने के लिए मोटर वाहन कानून के तहत सख्त नियम बनाए गए हैं। शराब पीकर वाहन चलाना गंभीर अपराध माना जाता है। अगर पुलिस जांच में ड्राइवर नशे में पाया जाता है, तो तुरंत चालान काटा जाता है। कई मामलों में कोर्ट केस भी बन सकता है। इसलिए ड्रिंक एंड ड्राइव को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
15000 रुपये का चालान कैसे लगता है
कानून के अनुसार पहली बार शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर 10000 रुपये तक जुर्माना या 6 महीने तक की सजा हो सकती है। लेकिन अगर तीन साल के अंदर दोबारा ऐसा करते पकड़े जाते हैं, तो जुर्माना बढ़कर 15000 रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे मामलों को दोहराया गया अपराध माना जाता है और सख्ती ज्यादा रहती है।
लोक अदालत में क्या मिल सकती है राहत
अगर आपका 15000 रुपये का चालान कट गया है, तो आप लोक अदालत में जाकर मामला सुलझा सकते हैं। लोक अदालत का मकसद लंबित मामलों को जल्दी निपटाना होता है। यहां कई बार रकम में राहत मिल जाती है। आम तौर पर केस की गंभीरता और आपके पुराने रिकॉर्ड को देखकर 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। लेकिन यह कोई तय नियम नहीं है।
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कितने में हो सकता है सेटलमेंट
पहली बार पकड़े गए मामलों में अक्सर थोड़ी नरमी दिखाई जाती है। कई मामलों में 10000 या 15000 रुपये का चालान घटकर लगभग 5000 से 8000 रुपये के बीच निपट जाता है। लेकिन अगर यह दूसरा या तीसरा मामला है, तो राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। अंतिम फैसला जज के हाथ में होता है और वही तय करते हैं कि कितनी रकम ली जाए।
क्या-क्या ध्यान रखना जरूरी है
लोक अदालत में खुद मौजूद रहना जरूरी होता है। वहां अपनी गलती माननी होती है और आगे ऐसा न करने का भरोसा देना पड़ता है। आपका व्यवहार और जवाब काफी मायने रखते हैं। अगर आप पेश नहीं होते, तो राहत की संभावना कम हो जाती है। इसलिए समय पर पहुंचना और जरूरी दस्तावेज साथ ले जाना जरूरी है।
याद रखें, नियम तोड़ना महंगा पड़ सकता है
लोक अदालत राहत का रास्ता जरूर देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार छूट मिल ही जाए। ड्रिंक एंड ड्राइव न सिर्फ जुर्माना बढ़ाता है, बल्कि लाइसेंस सस्पेंड होने या जेल तक की नौबत ला सकता है। इसलिए सबसे बेहतर यही है कि शराब पीने के बाद वाहन न चलाएं। कानून से बचने से बेहतर है नियमों का पालन करना।