ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस अब सोशल मीडिया और पेट्रोल पंपों से निकलकर दिल्ली की सड़कों और संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। 31 जुलाई से 4 अगस्त के बीच राजधानी में तीन अलग-अलग बड़े कार्यक्रमों का ऐलान किया गया है। कहीं गाड़ी मार्च निकलेगा, कहीं राष्ट्रीय टाउनहॉल होगा तो कहीं टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियन संसद तक मार्च की तैयारी कर रही हैं। विरोध करने वालों के बीच सबसे बड़ी मांग वाहन मालिकों को ई20 के साथ बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल या दूसरे विकल्प चुनने का अधिकार देने की है।
31 जुलाई को इंडिया गेट से ‘गाड़ी मार्च’
सबसे पहले 31 जुलाई को सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति तहसीन पूनावाला ने इंडिया गेट से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक ‘गाड़ी मार्च’ निकालने का ऐलान किया है। पूनावाला लगातार ई20 नीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं और लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि वाहन मालिकों को पेट्रोल चुनने का विकल्प मिलना चाहिए और नीति से जुड़े सवालों पर सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए। ऐसे में 31 जुलाई का यह कार्यक्रम ई20 के खिलाफ दिल्ली में होने वाले विरोध की पहली बड़ी कड़ी बन सकता है।
केजरीवाल ने 1 अगस्त को बुलाया राष्ट्रीय टाउनहॉल
इसके ठीक अगले दिन यानी 1 अगस्त को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुबह 11:30 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई20’ आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने लोगों से ऑनलाइन और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर अपनी बात रखने की अपील की है। केजरीवाल ने हाल के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए लोगों से ई20 के मुद्दे पर भी संगठित होकर आवाज उठाने की बात कही है। इससे साफ है कि ई20 की बहस अब राजनीतिक रूप भी लेती दिखाई दे रही है।
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4 अगस्त को टैक्सी-ट्रांसपोर्ट यूनियनों का संसद मार्च
ई20 के खिलाफ तीसरा बड़ा कार्यक्रम 4 अगस्त को प्रस्तावित है। दिल्ली की कई टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। यूनियनों का कहना है कि कमर्शियल वाहन चलाने वाले लोगों के बीच ई20 को लेकर माइलेज, रखरखाव और पुराने वाहनों पर इसके असर जैसे कई सवाल बने हुए हैं। उनकी मांग है कि सरकार इन सवालों का स्पष्ट जवाब दे और सभी पक्षों से बातचीत के बाद आगे का रास्ता निकाले। ऐसे में पांच दिनों के भीतर तीन कार्यक्रमों ने ई20 विवाद को और गरमा दिया है।
‘E20 जनता पार्टी’ ने सोशल मीडिया पर बढ़ाया दबाव
सड़कों पर उतरने की तैयारियों के बीच ‘ई20 जनता पार्टी’ नाम का डिजिटल अभियान भी तेजी से चर्चा में आया है। यह कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं, बल्कि खुद को नागरिक अभियान बताने वाला सोशल मीडिया समूह है। इसकी प्रमुख मांग है कि वाहन मालिकों को ई20 के साथ 100 प्रतिशत बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल चुनने का विकल्प भी मिले। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक इंस्टाग्राम पर इससे 4.62 लाख से ज्यादा और एक्स पर करीब 55 हजार लोग जुड़ चुके हैं। अभियान को कॉकरोच जनता पार्टी की तर्ज पर शुरू हुए डिजिटल आंदोलन के रूप में भी देखा जा रहा है।
सरकार बता रही फायदे, विरोध करने वाले मांग रहे विकल्प
सरकार ई20 पेट्रोल को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों के लिए इथेनॉल का बाजार बढ़ाने और पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद नीति के रूप में पेश करती रही है। दूसरी तरफ विरोध करने वाले समूह पुराने वाहनों, माइलेज और रखरखाव लागत को लेकर सवाल उठा रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी ई20 से वाहनों में तकनीकी खराबी के दावों को चुनौती दे चुके हैं। अब 31 जुलाई का गाड़ी मार्च, 1 अगस्त का राष्ट्रीय टाउनहॉल और 4 अगस्त का संसद मार्च तय करेगा कि यह विरोध आगे कितना बड़ा रूप लेता है। फिलहाल ई20 की लड़ाई सिर्फ पेट्रोल तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि ‘फ्यूल चॉइस’ और उपभोक्ता के अधिकार की बहस इसके केंद्र में आ गई है।