E20 Petrol Benefits : देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने सुझाव दिया कि पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं, जो अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। इस चर्चा के बीच इंडियन ऑयल ने E20 कार्यक्रम के फायदों से जुड़े कई आंकड़े साझा किए हैं।
विदेशी मुद्रा बचत का बड़ा दावा
इंडियन ऑयल के मुताबिक, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की वजह से देश को विदेशी मुद्रा के मोर्चे पर बड़ा लाभ मिला है। कंपनी का दावा है कि अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई जा चुकी है। साथ ही लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के स्थान पर इथेनॉल का उपयोग किया गया है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
किसानों को मिला बड़ा आर्थिक लाभ
इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को किसानों की आय से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इंडियन ऑयल के अनुसार, इस योजना के तहत किसानों को अब तक 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। इथेनॉल उत्पादन में गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त बाजार और आय का अवसर मिला है। यही वजह है कि सरकार इसे कृषि और ऊर्जा क्षेत्र दोनों के लिए लाभकारी बता रही है।
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पर्यावरण को भी फायदा होने का दावा
तेल कंपनी के मुताबिक, इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। जारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ है। सरकार और तेल कंपनियां E20 को स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी E20 के समर्थन में कई तर्क दिए हैं। मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग बढ़ाता है, जिससे इंजन में नॉकिंग की समस्या कम होती है और इंजन का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। मंत्रालय का कहना है कि E20 की व्यापक स्तर पर जांच और परीक्षण किए गए हैं। इसमें इंजन की टिकाऊ क्षमता, वाहन की कार्यक्षमता, स्टार्टिंग प्रदर्शन, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी और जंग से बचाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।
बहस अभी भी जारी
हालांकि E20 के फायदों को लेकर सरकारी एजेंसियां और तेल कंपनियां लगातार आंकड़े पेश कर रही हैं, लेकिन पुराने वाहनों की अनुकूलता और माइलेज जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन की वास्तविक ईंधन खपत सिर्फ पेट्रोल की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, वाहन की स्थिति, टायर प्रेशर और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसे कई कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं। ऐसे में E20 को लेकर बहस अभी खत्म होती नहीं दिख रही, लेकिन सरकार और तेल कंपनियां इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन रणनीति का अहम हिस्सा मान रही हैं।