भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल से गाड़ियों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस देखने को मिली है। लेकिन भारत ऐसा करने वाला अकेला देश नहीं है। दुनिया के कई देश पेट्रोल में इथेनॉल मिला रहे हैं। कुछ देशों में भारत से कम इथेनॉल मिलाया जा रहा है तो कुछ देश E30, E85 और यहां तक कि 100 फीसदी इथेनॉल का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
आखिर पेट्रोल में क्यों मिलाया जाता है इथेनॉल
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। भारत समेत कई देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेश से खरीदते हैं। इससे हर साल बड़ी रकम खर्च होती है। इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोल की जरूरत कुछ कम हो सकती है। इसके साथ ही प्रदूषण कम करने और देश में ईंधन की जरूरत को पूरा करने में भी मदद मिलने की बात कही जाती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश धीरे-धीरे पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ा रहे हैं।
ब्राजील में 100 फीसदी इथेनॉल का भी इस्तेमाल
इथेनॉल के इस्तेमाल में ब्राजील दुनिया के सबसे आगे रहने वाले देशों में शामिल है। वहां E30 के साथ 100 फीसदी इथेनॉल वाले ईंधन का भी इस्तेमाल होता है। पैराग्वे भी E30 अपना चुका है जबकि बोलीविया ने E25 का लक्ष्य रखा है। अमेरिका में ई10 और ई15 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्रिटेन में E10 लागू है। वहीं यूरोप के 19 देशों में भी E10 पेट्रोल मिलता है। फिनलैंड ने 2027 तक E22.5 तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
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भारत E20 पर पहुंचा अब ई30 की तैयारी
भारत फिलहाल E20 पेट्रोल तक पहुंच चुका है। यानी पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2030 तक ई30 तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब आने वाले समय में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा और बढ़ सकती है। हालांकि भारत में अभी सबसे ज्यादा सवाल पुरानी गाड़ियों को लेकर उठ रहे हैं। वाहन मालिक जानना चाहते हैं कि ई20 पेट्रोल का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से उनकी गाड़ी के इंजन और दूसरे हिस्सों पर क्या असर पड़ सकता है।
एशिया के कई देश भी बढ़ा रहे इथेनॉल
भारत के अलावा एशिया के कई देश भी पेट्रोल में इथेनॉल मिला रहे हैं। नेपाल में E10 पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। थाईलैंड में ई10 जरूरी है जबकि वहां ई20 और ई85 का विकल्प भी मिलता है। वियतनाम में अलग-अलग पेट्रोल में E5 और E10 का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलीपींस में E10 जरूरी है और E20 पर विचार चल रहा है। जापान ने 2030 तक ई10 और 2040 तक ई20 लागू करने का लक्ष्य रखा है। यानी कई देश धीरे-धीरे इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की तैयारी में हैं।
फिर भारत में ई20 पर इतना बवाल क्यों
भारत में ई20 को लेकर सबसे बड़ा सवाल गाड़ियों की तैयारी और वाहन मालिकों की चिंता से जुड़ा है। नई गाड़ियों को ई20 पेट्रोल के हिसाब से तैयार किया जा रहा है लेकिन पुरानी गाड़ियों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। दूसरी तरफ सरकार का जोर कच्चे तेल की खरीद कम करने और इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने पर है। दुनिया के दूसरे देशों को देखें तो भारत अकेला नहीं है लेकिन हर देश ने अपनी जरूरत और गाड़ियों के हिसाब से अलग नियम बनाए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत में ई20 से जुड़ी लोगों की चिंताओं को सरकार और वाहन कंपनियां किस तरह दूर करती हैं।